SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 177
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ सिरिसंतिनाहचरिए या वि भणइ 'भयवं ! दत्तऽवहाणो अहं अओ मज्झ । साहिज्जउ अक्खाणयमेयं काउं मह पसायं ॥ ९॥१०३१॥ तो बारविहदुदुहिसमाण अइगहिरसद्दणिग्घोसो । चारणमुणी महप्पा अह एवं भणिउमाढत्तो ॥ १०॥१०३२॥ "अत्थि इह भरहवासे दाहिणखंडस्स मज्झयारम्मि | अच्छेरयसय कलियं कणयपुरं णाम वरणयरं ॥ १ ॥१०३३॥ तं परिपालइ राया कणयरहो णाम णिग्गयपयावो । दरियारिमत्तमायंगकुंभणिब्भेयमयणाहो ॥२॥१०३४ ॥ जस्सय अप्पमाणा मंती, मंतिस्समा य सामंता । सामंतसमा य भडा, भडसरिसा जस्स पाइक्का ||३||१०३५ ॥ पाइक्कसमा कम्मंतकारिणो, इय असेसपुरिवग्गो । जस्स अणण्णसमाणो, किं बहुणा तत्थ भणिएणं ? ॥ ४ ॥ १०३६ ॥ तस्सऽत्थि सयल अवरोहविलयमज्झम्मि णायगा देवी । णामेणं कणयसिरी रुवाइगुणेहिं रइसरिसा ॥५॥१०३७ ॥ बीया चंद्रकला इव जणमणआणंदयां य अकलंका । वेल व्व रयणसोहासमन्निया तरलहारा य ॥ ६ ॥ १०३८ ॥ das य् सुचरणा विसुद्धदियसोहिया य णिचं पि । गिरिभूमि व्व सुसरला सुनियंबसमन्निया तह य ॥७॥१०३९॥ सो तीए समं भोए भुंजइ णिचं पि मयमुइयचित्तो । पालेइ य तह रज्जं रंजतो सं पयाणिवहं ॥ ८ ॥१०४० ॥ अह तस्स पुइवइणो गोरव्यो णिवसए तहिं सेट्ठी । णामेण रयणसारो णीसेसकलाऽऽगमपहाणो ||९||१०४१॥ १. दृश्यतां तृतीयं परिशिष्टम् ।। २. समाणो मंती पा० जे० ॥। ३. 'या ऽकलंका य। पा० का० ॥ ४. य नियर का० ।। ५. सिडी पा० ॥ *45+3+3+3+3+3+3+3+3+34343+5+5434343434243 मच्छोयरकहाणय १२७
SR No.600084
Book TitleSiri Santinaha Chariyam
Original Sutra AuthorDevchandasuri
AuthorDharmadhurandharsuri
PublisherB L Institute of Indology
Publication Year1996
Total Pages1016
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size17 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy