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________________ भीमन्महाभारतम् । श्लोकानुकरणी व्याधि कुलक्षयं चैव (अन) १३५.१५ व्यामोहमगमद्राजन (द्रोण) २.०.१२७ व्यालकुञरदुर्गेषु (शांति) ३२२.५ व्यासश्च भगवान् (आश्रम) २७.२२ व्युपरम्प ततो यदा (भीष्म) १२०.३० व्याधि मृत्यु भयं चैव (विरा) ६.२४ व्यामोहयं च तान (वन) १७१.२२ व्यालतस्करसंकीर्ण (कर्ण) ९३.१३ पासस्य वचनं श्रुखा(अनु) १४५.४३ म्यूषितायो त शर्वर्या (भीष्म बाधितो दुःखिता(शांति) २८४,२०० व्यायच्छन्ति च तत्रापि(द्रोण) १३०.६ व्यालम्बिपीतान्तपटपच (भीष्म)५६.६१ व्यासस्यानुमते राज्ञ (आश्रम) ८.१८ युषिताश्व इति ख्यातो (आ) १२१.७ न्याधिभिमध्यमाना (शांति) ३३१.३० व्यायच्छन्तो हताः (द्रोण) १५०.२४ व्याल यज्ञोपवीती च (अनु) १४०.१६ व्यासाख्यातस्य वित्तस्य(आश्व)६३.१२ ब्युषिताश्वे यशोवृद्ध (आ) १२१.१४ म्याधिमिच्छामि ते (अनु) १००.६२ व्यायच्छमानं गदया (भीष्म) १२.६० व्यालादींश्चातिबलवान् (द्रोण) ६८.४ व्यायादीनगिवाद्यर्षीन् (शांति) ५६.३ व्युषितो रजनी चाहं (वन) १६८.२ न्याधिरग्निर्जलं शस्त्र (शांति) २८.२५ व्यायच्छमानाः समरे (शल्य) २.३० व्यालस्त्रसर्वोत्तमयत्न (कणे) १०.३३ व्यासेन नृपशार्दूल (वन) ८३.६२ व्युष्टां निशां भारत (भीष्म) ६०.१ माधिवर्णपरिक्लेश (शांति) १५६.६ व्यायता बलिनः शूराः (अनु) ५०.१३ ज्यालास्त्रसमॆत्त मय (कर्ण) १०.४६ व्यासेन वेदविदुषा (शांति) ४७.५ व्यासेन वेदविदुषा (शांति) ४७.५ व्युष्टायां तु महाराज (भीष्म) १२१.१ ग्याधीनां चापि (शांति) १८४.१५ व्यायतायतबाहमा (कर्ण) १२.५ व्यालीव मन्त्राभिहता (द्रोण)१८६.१८ व्यासेनैवमथोक्तस्तु (द्रोण) १४.१ व्युष्टायां तु वरारोहे (द्रोण) ७७.१६ व्याधीन् प्रणुद वीर (उद्योग)१४७.२८ व्यायम्य बहुधा नूनं (स्त्री) २०.१३ व्यालेरावारित धोरेवियो(आ) १७.७ व्यासेनोदारमतिना (आ) २.२४४ व्युष्टायां वै राजन् (उद्योग) १५५.१ व्याधरनिष्टसंस्पर्शाच्छु (वन) २.२२ व्यायामकशितः सोऽथ (आ) १७५.६ व्यालश्च वनदुर्गान्ते (स्त्री) ५.२२ व्यासोऽप्युवाच तं देव (आ) १.७६ व्युष्टिरेषा परा स्त्रीणां (आ)१५८.२२ पाघ्रदत्तस्तु पांचाल्यो (द्रोण) १६.३४ व्यायामलान्तहृदयाः (बा) ६९.२७ व्याविद्यनिष्कासव (भीष्म) ५६.१०६ व्यामो वसिष्ठो मैत्रयो (वन) ३१.१२ व्यूढं दृष्ट्वा सृपणं तु (द्रोण) २०.४ पानश्च तमुदानश्च (आश्व) २३.१२ व्यायाममतिमात्रं च (बाश्व) १७.११ व्यावृत्तनयनः कुवः (बोण) २६.२२ व्यावृत्तनयनः कुबः (बाण) २५.२२ ब्याहरत्स्वृषिपुत्रेषु मा (आ) ४०.३० व्यूढं दृष्ट्वा तु तत् (भीष्म) ५६.१० न्यानेन सम्भूतो बायुः (आश्व) २३.५ व्यायामशीलाः सततं(शांति)१५८.१६ व्यावृत्तंऽयम्णि राजेन्द्र (द्रोण) १.२१ व्याहरिष्यन्निवातिष्ठत् (द्रोण) १०५.१७ ब्यूदं दृष्ट्वा तु तत् (भीष्म) ७५.१५ म्यापकं सर्वभूतेषु (शांति) २१६.१३ व्यायामश्चायमत्यर्ष (आश्व) १.७२ व्यासप्रसादाधू तवानेत(भीष्म)४२.७५ial म) १२.७५ व्याहतुकामे वरदे नृपे (आ) ५६.३ व्यूढानीकनि सैन्यानि(विरा) ४६.२३ म्यापृतस्तु श्मशाने यो(वन) २३१.५१ व्यायाम मुष्टिभिः (वन) १६७.४० व्यासप्रोक्तमिमं मन्त्रं (अनु) १५०.४ १५०. व्याहृतं व्याहृताच्छेय (उद्योग)३६.१२ व्यूढानीकस्ततो द्रोण द्रोण) २०.३ व्या व्याप्तं जगत् सर्व (वन) २३२.१९ व्यायामे कर्कशत्वं (अनु) १२.१५ व्यासमामन्य राजेन्द्र (अनु) २४.२ व्युत्कान्तधर्म तमहं (अनु) ६६.२६ व्यूढानीकान्महाराज (वन) ५२.१७ बाप्य कृत्स्नं जगत् (द्रोण) ५६.८ व्यायामेन ममानेव जाता(वन)२९७.३ व्यासश्चाकथयत् (शांति) ३४८.८६ व्युत्क्रान्तानपरान्योधा (कर्ण) ५८.३६ व्यूढानीका वयं द्रोणं (द्रोण) ७३.२ व्यापान्तरं सकास्थाय (उद्योग) ६८.२ व्यायुधं नावधीननं (द्रोण) १३६.९२ व्यासः सर्गः सुसंक्षेपो (अनु) १७.१४१ व्युत्थानं च विकांक्ष (शांति) १११.४३ व्यूढानीका व्यतिष्ठन्त (वन) २४.६ च्यामिश्रेण वाक्येन बुद्धि(भीष्म)२७.२ व्यावर्तमाने भगवत्यु (शांति) ११.१६ व्यासः सशिष्यो भगवान्(आश्व)८६.७ व्युत्थापयन्तु वा कृष्णां(बा) २०१.६ व्यूढेनासुरयुद्ध न हत्वा(शांति) २६.६७ म मोहयत राजनं (कर्ण) २६.२६ मालधारदुर्गेषु (थांति) ११.५ व्यापश्त्र भगवान् (प्राश्रम) १.१४ म्युत्थितोत्पत्तिविज्ञान (भो । १५.६ बा देवासुरे यूद्ध कलाद्रिोण) ६३.५ Jain Education Intersalon For Prve & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600055
Book TitleMahabharatam
Original Sutra AuthorNagsharan Sinh
Author
PublisherNag Prakashan Delhi
Publication Year1992
Total Pages840
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size30 MB
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