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________________ बीमन्महाभारतम् : : लाकानुकाणी ४२६ पृष्टद्य म्नं च भीमं च(भीष्म) ७७.५२ धृष्टद्युम्नं महेष्वासं (द्रोण) १०.११ धृष्टद्युम्नः शिखण्डी (द्रोण)१५८.३६ धृष्टद्युम्नस्तु तद्वाजन्(द्रोण) १९२.७० धृष्टद्य म्नस्त्व सुतं वार(कर्ण) ५६.२० धृष्टद्युम्नं च विशत्या (होण) १२४.३४ घृष्टच म्नं युधामन्यु (कर्ण) १६.१. धृष्टद्य म्नः शिखण्डी (भीष्म) ८६.१६ धृष्टद्युम्नस्तु तं दृष्ट्वा(भीष्म)५४.६६ धृष्टद्युम्नस्य चोत्पत्ति (आ) १६५.८ धृष्टद्युम्नं च विंशत्या(भीष्म)Y८.११० घृष्ट म्नं रणे दृष्ट्वा (कर्ण)९३.३८ धृष्टद्य म्न शिखण्डी च(भीष्म) १०३.४ घृष्टद्य म्नस्तु तान् (होण) १८६.१५ धृष्टद्य म्नं च विव्याध (द्रोण) १९१.१८ धृष्टतुम्नं समासाच (कर्ण) ७३.४५ घृष्टच म्न: शिखण्डी च (शल्य) ५.१६ धृष्टद्युम्नस्तु निविद्धः (कर्ण) ६१.२७ धृष्टय म्नस्य भगिनी (वन) २७.३५ धृष्टद्युम्नं च समरे (द्रोण) १६५.१६ अष्टाम्न समपिस्वं (कर्ण) ५९.२८ घृष्टद्युम्नः शिखण्डी च (शल्य) ७.१६ धृष्टद्युम्नस्तु निविद्धो (दाण) १७०.८ घृष्टयुम्नस्य भल्लेन (कर्ण) ५६.२६ 'वृष्टधुन पदमाह (डाण) १२. धष्टय म्नं सायकि (स्वर्ग) १.२४ धृष्टद्युम्न शिवण्डी च (शल्य) ६२.३ धृष्टच,म्नस्तु पाञ्चाल्यः (आ) १२.१ पटत नस्य भीमस धृष्टद्युम्नं ततः कणों (द्रोण) १७०.१५ वष्रय नहि विरवं कर्ण) Yem घृष्टद्युम्नश्च पाञ्चाल (उद्योग) ६५.६ पुष्टयम्नस्तु पाथाना (सभा) ८०. धृष्टय म्नस्य यमयो (कर्ण) ६६.११ धृष्टद्युम्नं ततः क्रुद्धो (शल्य) ११.३० धृष्टद्युम्नरयं गत्वा (द्रोण) १५६.१६१ धृष्टय म्नः सेदेवेतान्(उद्योग) ५७.४७ । धृष्टद्युम्नस्तु बलवानि(कर्ण)५४.४१ धृष्टद्युम्नस्य यो (द्रोण) १६४.१४ धृष्टद्युम्नं ततो यान्तं (कर्ण) ५४.१३ धृष्टद्युम्नरथं त्यक्त्वा (द्रोण)२००.१३० धृष्टद्युम्नः सपुत्रश्च (उद्योग)८३.३२ घृष्टच म्नस्तु मा (शल्य) २६.३७ धृष्टद्य म्नहतानन्या (भीष्म) ६२.४५ धृष्टद्युम्नं ततो विध्वा (भीष्म) १०३.५ ष्टा म्नवचः श्रुत्वा (शल्य) २६.३८ घृष्टय म्न सात्यकिश्व (कणं)४८.२० धृष्टद्युम्नस्तु राजेन्द्र (भीष्म)११४.४५ धृष्टद्युम्नादहं मुक्तः (गल्य) २५.५६ धृष्टद्युम्न तथा यान्तं (भीष्म)१११.४० धरच म्नश्च दर्धर्षः (द्रोण) ५.४. धृष्टय म्नश्च सूतैन (आ) २.३०३ घृष्टद्युम्नस्तु विरयो (द्रोण) १७३.६ धृष्टद्युम्नाभिमन्युभ्यां (शांति) ४२.४ धृष्टद्युम्नं तु पाञ्चाल्य(वन) १६७.५५ धृष्टद्य म्नश्च दुर्घर्षः (विरा) ७२.१८ घृष्टा म्नश्च सेनानी (उद्योग)१७१.४ । धृष्टद्य म्नस्तु शल्येन (भीष्म) ६२.८ धृष्टद्य म्मेन वीरेण (वन) ५१.२६ धृष्टद्युम्नं तु पाञ्चाल्यं (द्रोण ६५.४५ धृष्टद्युम्नश्च पाञ्चाल्यः (उद्योग)५३.५ धृष्टद्युम्नस्ततो द्रोण (भीष्म) ४५.३१ धृष्टद्युम्नस्तु समरे (कर्ण) ५४.३३ धृष्टद्यम्नेन सहितो (भीष्म) ७५.६ धृष्टद्युम्नं तु संयुक्त (भीष्म) ५५.५ धृष्टद्युम्नश्च (उद्योग) १४१.२५ घृष्टद्युम्नस्ततो द्रोणं (भीष्म) ५३.७ पृष्टद्युम्नस्तु संप्रेक्ष्य (द्रोण) १७.२४ धृष्टद्युम्ने सात्यको (द्रोण) २०१.११ घृष्टद्य म्नं तु संचिन्त्य (आ)२००.१५ धृष्टद्युम्नश्च (उद्योग) १५३.६ धृष्टद्युम्नस्तथा राजन् (द्रोण) १९२.३४ धृष्टद्युम्नस्तु समरे (कणं) ५६.३६ धृष्टद्युम्नोऽथ तस्याश्(द्रोण)१६१.१६ घष्टय म्न तु समरे (कर्ण) ५४.३१ धृष्टद्युम्नश्च पाञ्चाल (भीष्म) १६.१८ धृष्टद्य म्नस्ततो (द्रोण) २००.३६ धृष्टद्युम्नस्तु समरे (भीष्म) १०३.८ पृष्टा म्नोऽथ पाञ्चाल (भीष्म)८६.२६ धृष्टद्युम्नं न पश्याम (कर्ण) ६१.३३ धृष्टय म्नश्च राधेयं (कर्ण) ५६.६४ धृष्टद्युम्नस्ततो (भीष्म) ११५.१७ घष्टद्य म्नस्तु समरे (शल्य) १५.४ धृष्टद्युम्नो द्रोणमृत्यु (सभा) ८०.४८ धृष्टय म्न निबिभेदाथ (कर्ण) ५२.३ . धृष्टद्युम्न: शिखण्डी (भीष्म)१६२.१४ धृष्टद्युम्नस्तथा (भीम) ११०.४ धृष्टद्युम्नस्तु समरे (शल्य) २५.३७ धृष्टद्युम्नोऽपि समरे (भीष्म ५३.४० धृष्टद्युम्नं पुरस्कृत्य (शल्य) ३.३० धृष्टद्य म्नः शिखण्डी (कर्ण) १२.१४ धृष्टद्य म्नस्तथा (भीष्म) १०६.२१ धृष्टद्य म्नस्त्वभून्नेता(आश्व) ६०.१५ नुष्टद्युम्नो भृशोद्विग्रो (द्रोण) १२२.५२ धृष्टद्युम्नं महारो (शल्य) २५.५४ धृष्टद्य म्नः शिखण्डी च (कर्ण)९६.५० पृष्टद्युम्नस्तमारोग्य(भीम)५४११८ धृष्ट युम्नस्श्वसं (द्रोण) १५६.१६२ धृष्टद्य म्नोऽभ्ययात् (द्रोण) १५६.२६ For Private Personel Use Only Jan Education Intersalon www.janelibrary.org
SR No.600055
Book TitleMahabharatam
Original Sutra AuthorNagsharan Sinh
Author
PublisherNag Prakashan Delhi
Publication Year1992
Total Pages840
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size30 MB
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