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________________ श्रीमन्महाभारतम् :: ग्लोकानुगामी .२८॥ ततो युधिष्ठिरो राजा (वन) ३१२.५ ततो रक्षांसि सर्वाणि (आश्व) ७०.२ ततो रथसहस्राणि (बन) १७३.३३ ततो रथेषु भग्नेषु (शल्य) २५.२५ ततो राजा शुच्छ्रमातस्त(ओ) ४६.२५ ततो युधिष्ठिरो राजा (विरा) १.७ ततो रक्षो महाबाहु (भीष्म) १११.५ ततो रथसहस्रण (आश्व) ७७.१० ततो रथैः काञ्चनचित्र(शांति)५२.३१ ततो राजा जातरूपस्य(आश्व) १०.३४ ततो युधिष्ठिरो राजा (शल्य) १५.१६ ततो रङ्गाङ्गणगतो द्रोणो(आ)१३५.६ ततो रथसहस्रण (द्रोण) ८.१ ततो रथो घूणितवान् (कर्ण) १०.५३ ततो राजा तयोः (उद्योग) ६.३९ ततो युधिष्ठिरो राजा (शल्य) २३.६ ततो रजतपुखन (कर्ण) २७.२५ ततो रथसहस्रण (बोर) १५६.१६५ तता रावमत्रमयाच(उद्योग)१५२.२९ ततो राजा त्रिगर्तानां (विरा) ३२.२५ ततो युधिष्ठिरो राजा (शांति) ४२१ ततो रजतसंकाशा (द्रोण) १८.११ ततो रथसहस्रण (द्रोण) १३.५२ ततो रागः प्रभवति (वन) २१०.४ ततो राजा इ.पदो (उद्योग) १९ ततो युधिष्ठिरो राजा (शांति) ४.२ ततो रजन्या ब्युष्टायां (आ) २१.१ ततो रथसहस्रण (भीष्म) ५७.३७ ततो रागः प्रभवति (शांति) २७३५ ततो राजा धृतराष्ट्रो (उद्योग) ४२.१ ततो युधिष्ठिरो गजा (स्वर्ग) ४.१ ततो रजन्यां व्युष्टायां (आश्रम)११.१ ततो रथस्थः परवीर हंता (कर्ण)३७.११ ततो राजकुले नान्दी (शांति) ८२.६६ ततो राजानमभ्येत्य (द्रोण) १४६१ ततो युधिष्ठिरो राजा (सभा) ३३.५४ ततो रजन्यां व्युष्टायां (भीष्म) १६.१ ततो रथाच्छकुनि (शल्य) २८.६७ ततो राजन् काश्यप (वन) ११३.८ ततो राजानमामन्त्र्य (आ) १३४.८ ततो युधिष्ठिरो राजा (सभा) ३८.१ ततो रजन्यां न्यूष्टायां (वन) १६६.१ ततो रथादवप्लुत्य (द्राण) १२८.१५ तता राजन् जाम (उद्योग) १५१.१० ततो राजानमावतं (द्रोण) ३७१ ततो युधिष्ठिरो वश्यान (भीम)८६.१५ ततो रणायाभिमखी (भीष्म) ६०.६ ततो रथादवप्लुत्य (वन) २४१.३२ ततो राजन्नदृश्यद्धि (आ) २१०.१६ ततो राजानमासाद्य (उद्योग) ८८.१५ ततो युधिष्ठिरो वाक्य (भीष्म) ४३.४६ ततो रणे तावकाना (शल्य) १७.११ ततो रथाम्या प्रस्कन्ध (विरा) ३३.५ ततो राजन्नभूखोरः (द्रोण) १५६.५२ ततो राजा परिक्रम्प (आ) १७६.२७ ततो युयुत्सुः कौरव्यान(भीम)४३.१०० ततो रणे नरव्याघ्र (द्रोण) ६५.१५ तत ततो रथाभ्या रबिनो (विरा) ३२.२६ ततो राजन्पार्थिवाः सर्व (वन) ४.१५ ततो राजा पाण्डवो (आश्व) १०.३७ ततो युयुत्सुमानाय्य (महा) १.६ ततो रत्लान्यनेकानि (अनु) ५३.४० ततो रथाश्च बहुला (शांति) ३७४२ ततो राजन् ब्राह्मणास्ते(शांति) ३८.३१ ततो राजा पाडसतो (शांति) ३१.१ ततो यूयोछये प्राप्ते (आश्व) ८८.२७ ततो रत्नान्युपादाय (सभा) ३१.११ ततो रथाश्वांश्च मनुष्य(द्रोण)१८६.४ ततो राजन् भगवान् (मी) ४.२६ ततो राजा पांजलि (आयम) १५.६ ततो ये क्षत्रिया राजन (शांति)४६.६१ ततो रलान्यपादाय (सभा) ३१.२१ ततो रथा हया नागा: (सभा) ३१.२४ तता राजन्महानासा (द्राण) १५२." ततो राजाऽवीट (आ) . ततो योगबलं कृत्वा (मांति) २८३.३२ ततो रथं पोणि (सौप्तिक) ३ ततो रथन शुभ्रण (उद्याग) १४.१२ ततो राजन्महाबाहु (शल्य) १३.३२ ततो राजा महाप्राज्ञ (वर्ण) ३५.३६ ततो योगीश्वरेणापि (वन) ६२.१२१ ततो रथं समारोप्य (भीष्म) ७७.६५ ततो रथेन शुभ्रण (उद्योग) १३१.२८ ततो राजन्महेष्वासः (शल्य) २१.२२ ततो राजा महातेजा (शांदि) ५६.४ ततो योजनविंशानां (वन) १८८.७२ ततो रथं समारुह्य (उद्योग)१८६.१२ ततो रथेन शुभ्रण (उद्योग) १३१.४१ ततो राजनस्तव सुता (भीष्म) ६६.१६ ततो राजा महावीर्यो (आ) १८७.२६ ततो योधान् जघानाशु(आश्व)७४.२६ ततो रथं समुत्सृज्य (भीष्म) ७७.१६ ततो रथेन शुभ्रण (आ) १३८.११ ततो राजर्षयः सर्वे (वन) ६.३ ततो राजा महावीर्यों (अनु) ५१.४३ ततो रक्षः पिशाचाश्च (कर्ण) ३०.४४ ततो रथमवस्थाप्य (वन) ७२.१२ ततो रथेनाम्बुदवन्द (कर्ण) १४.५५ ततो राजसहस्राणि (शांति) २७१.४४ ततो राजा मुचुकुन्दः (शांति) ७४.२० For Private Personale Only www.atelibrary.org
SR No.600055
Book TitleMahabharatam
Original Sutra AuthorNagsharan Sinh
Author
PublisherNag Prakashan Delhi
Publication Year1992
Total Pages840
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size30 MB
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