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________________ 1 छत्रैस्तथाऽपविद्धैश्च ( भीष्म) १६.०५ छत्रोपानहमेतत्तु सूर्येण (अनु) ६६.१६ छद्मकामैर कामस्य (शांति) ८२-३७ छद्मनाच भवेत्सिद्ध: ( सौप्तिक) १.४९ छद्मना निचितास्ते तु वन) २३६.८ छद्मना निहतं श्रुत्वा (द्रोण) १५.१ छद्मना निहतं श्रुत्वा (द्रोण) १९५.१ छन्दतो मृत्युरित्येवं (भीष्म) ११९.१०८ छन्दांसि दीक्षा यज्ञाश्च(अनु) १४.३६८ छन्दांसि नाम क्षत्रिय (उद्योग) ४३.५० छन्दांसि नाम द्विपदां (उद्योग) ४३.५१ छन्दांसि वैमादृशं (वन) १६२.५० छन्द्यमाना वरेणाथ (उद्योग) १८७.८ छन्न तथा तं सत्रेण: (विरा) ३८.४० छन्नं वाध्यव रोप्यन्तम (स्त्री) ३.१३ छम्नमायोधनं सर्वं शरीर (विरा ) ६२.८ छन्नमायोधनं राजन् ( भीष्म) ११७.५३ छन्नमायोधनं राजे (भीष्म) ११८.१२ छन्नमिच्छसि कोन्तेय (बन ) ३५.२४ छागं अग्निर्गुणोपतं (बनु ) ८६.२४ Jain Education International छागशार्दूलरूपश्च (अनु.) १४.१४० छागस्तु निधनं प्राप्य (अनु) १११.७० छागेनाजेन यष्टव्यं (शांति) ३३७.१४ छात्राणिच महार्हाणि ( भीष्म) ४८.३० छादयन्तो महाघोपा :- (वन) १८२.२ छादयन्तो महाराज (द्रोण) १६.१० छादयन्ती महात्मानौ (द्रोण) १२२.६८ छादयन्ती हि शत्रुना (द्रोण ) १३२.३६ छादयांचक्रिरे संये (द्रोण) १६४.३५ छादयामास च तदा द्रोण) १४५.७१ छादयामास च शरैः (द्रोण) १६०.४१ छादयामास तत् सैन्य (कर्ण) ५५.२० छादयामास बागोध: (द्रोण) १५६.५८ छादयामास बाणौधैः (द्रोण) १६०.३३ छादयामास पार्थोऽय (द्रोण १५९.५.३ छादयामास विशिखे (कर्ण) ५१.३४ छादयामास समरे क्रुद्धो (कर्ण) ५५.३७ छादयामास समरे गजा (कण ) ६१.६५ छादयामाम समरे द्रोण (द्रोण ) २००.८६ छादयामास समरे मेघः (द्रोण) ९३.६६ श्रीमन्महाभारतम् छादयामास समरे मेघ : (द्रोण) ९३.६६ छन्दयामास समरे शरैः (कर्ण) ५९.१३ छादयामास स शरैः (द्रोण ) १४५.८३ छादयामास समरे शरै: ( भीष्म) ८२.४६ छादयामास समरे (भीष्म) १०१.२७ छादयामि जगत (शांति) ३४१.४१ छादयत्वा ततो बाण: (कर्ण) ६०.६६ छादयित्वा रणे द्रोणो ( द्रोण ) १२५.४५ छादयित्वा रणे राजन् (द्रोण) ११३.५६ छादयेता महेष्वासो (द्रोण ) १५९.६० छादितः पाण्डवैः शूर ( भीष्म) १०५.३ छाद्यमानष्ट्वा (द्रोण) १६२.३५ छाद्यमानः शरोघेण (भीष्म) ८३.४५ छाद्यमानस्तु नार्गः स ( भीष्म) १०.७५ छायातप विलेखं च (आश्व) ४५.४ छयाद्वितीयो ज्ञान (वन) ५७.२५ छाराभूताय दान्ताय (आश्व) ३५.१४ छायां स्वपुत्रसदृशी (शांति) ३३३.३८ छायायामातये चैव (शांति) ३२५.३० छायेवानुनता राजन (प्रा) १२१.२५ For Private & Personal Use Only छावस्वतस्य भवनं गतं (द्रोग) ४५.१८ छित्व नेकामि सत्वानि (आ) २२८.११ छित्वा दमं च मानं (शांति) १५१.१६ छित्वा धनूंषि शूराणां (द्रोण ) ४०.३३ छित्वा धनूंषि शूराणां (भीष्म) ११४.१३ छत्वा मयं पाशं (शांति ) २६८.४ छित्त्वाऽनदत् पाण्डुसुन (भीष्म) ८५.३१ छित्वा प्रहरणान्येषा (वन) १७०.२२ छित्वा भीमो महाराज (द्रोण ) १३३.२६ छित्वा शक्ति ततो (द्रोण) १३३.२५ छित्वा शक्ति तु ( भीष्म) १०४.३६ छित्त्वा शिरो वै (शांति) २८४.५० छिना सुकृतो यान्ति (शांति ) २७७ २७ छियते ह्याततं सर्वं (उद्योग) १२४.४३ छिद्यमानस्य महतो ( सौप्तिक ) १०.५ छिद्यमन्नाः शितैः शस्त्रे (स्त्री) २६.१६ छिद्र ं न स्म प्रपश्यन्ति ( आ ) २२६.३ छिद्राणि विवृतान्येव (शांति ) १५२.३६ छिद्रान्वेषी समुद्विग्न: (उद्योग) १०.३३ छिद्रव्येतेषु तं बाणे (दोन) १८८.६ २४.६० २४३ छिद्रव्वेतेष्विमे नित्यं (आश्व) ५७.२४ छिन्द्रि मिन्द्धि प्रधाव (आ) १६.१८ छित्रिमूर्धानमस्याशु (द्रोण) १४६.७३ छिन्नः कालेन सोऽप्यत्र ( आ ) ४५.३० छिन्नगात्रा व राश्चैव (कर्ण) छिन्नागा विकवचैव (कर्ण) ८०.६ छिन्नदन्ताग्रहस्ताश्च ( भीष्म ) ५४.५२ छिन्नदोषो मुनिर्योगान् (शांति) २३६.३ छिन्न धनुषि पार्थेन (विरा) ५७.२६ छिन्नधन्वा महाराज (द्रोण) १६६.११ छिन्नध्वजधनुश्छत्रः (शल्य) २८.५७ छिन्नध्वजेन शल्यस्तु (कर्ण) ९५.११ छिन्नप्ररोहणं दुग्धं (द्रोण) ६६.१८ छिन्नबाहुं परैर्हन्या (द्रोण) १६८.३१ छिन्नमाज्ञाय निस्त्रिशम (कर्ण) २५.३८ छिन्नमूले त्वधिष्ठाने (शांति) १४०.१० छिन्नमूले ह्यविष्ठाने (आ) १४०.१७ छिन्न वर्मा शरैः पार्थो (क) ४९.४४ छिन्नशीर्ष विदेहाश्च (वन) १०७.२६ छिन्नस्तन्धः स विनद (भीष्म) ४४.४१ www.jainelibrary.org
SR No.600055
Book TitleMahabharatam
Original Sutra AuthorNagsharan Sinh
Author
PublisherNag Prakashan Delhi
Publication Year1992
Total Pages840
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size30 MB
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