SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 176
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ 1500010卐 अग्निवैशायन गौत्रीय स्थवीर आर्य सुधर्मा के काश्यप गौत्रीय स्थवीर आर्य जंब नाम के अन्तेवासी थे काश्यपगौत्रीय आर्य जंबू के कात्यायन गौत्रीय आर्य प्रभव नामक अन्तेवासी थे । कात्यायन गौत्रीय स्थवीर आर्य प्रभव के वात्स्यगौत्रीय स्थवीर आर्य शय्यं भव नाम के अन्तेवासी थे, 3 आर्य शय्यंभव मनक के पिता थे । आर्य शय्यंभव के तुंगियायन गौत्रीय स्थवीर जसभद्द नामक अन्तेवासी था। ___(२०६) आर्य यशोभद्र (जसभद्द) से आगे स्थवीरावली संक्षिप्त वाचना सेइस प्रकारकही हुई है: वो इस प्रकार 2 से, तुंगियायन गौत्रीय स्थवीर आर्य यशोभद्र के दो स्थवीर अन्तेवासी थे । एक माढ़र गौत्र के आर्य संभूति विजय स्थवीर और दूसरे प्राचीन गौत्र के भद्रबाह स्थवीर । माठर गौत्रीय स्थवीर आर्य संभूति विजय के गौतम गौत्रीय आर्य स्थलिभद्र अन्तेवासी थे । गौतम गौत्रीय स्थवीर आर्य स्थलिभद्र के दो स्थवीर अन्ते वासी थे, एक एलावच्च गौत्रिय स्थवीर आर्य महागिरिऔर दूसरे वासिष्ठ गोत्रीय गोत्रिय स्थवीर आर्य सुहस्ती। 170
SR No.600025
Book TitleBarsasutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipak Jyoti Jain Sangh Mumbai
PublisherDipak Jyoti Jain Sangh Mumbai
Publication Year2002
Total Pages224
LanguageHindi
ClassificationManuscript & agam_kalpsutra
File Size26 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy