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अञ्जन प्र.कल्प
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सिंहासनपूजन:___“ॐ हाँ हाँ हूँ हूँ ह्रौ हः अहं परमब्रह्मणे अ-सि-आ-उ-साय नमो हंसः स्वाहा" ए मंत्र बोली | अरिहंत प्रभुना सिंहासनादिक पर बासक्षेप करवो. नूतनबियो उपर वासक्षेप :
"ॐ हाँ हाँ हूँ हैं ही हू: अर्हद्भयो नमः ॐ ह्रीँ नमो अरिहंताणं ॐ ही अर्हते नमः" ए मंत्रथी वासक्षेप मंत्रीने नवा विबो पर करवो. वासक्षेपयुत दूधथी सर्वांगविलेपनः___ त्यार बाद " ॐ परमहंसाय परमेष्ठिने हंसः हंसः हसः हैं हैं हाँ हाँ हूँ है हो है हः अहंते नमः" ।
श्रीजिनबिम्बं संस्थापयामि संवौषट् ' ए मंत्रथी पाणी साथे वासक्षेप मंत्रीने नवीन जिनर्वित्र पर नांखवो तथा तेनु | सर्व अंगे विलेपन करवू. पछी तेनी आगळ दूधथी भरेलो सुवर्ण कलश स्थापवो.
सुवर्णकळशमां विंबस्थापन :--नीचेना के श्लोक तथा मंत्र बोलया पूर्वक पूर्व अप्रतिष्ठित नूतन जिनबिंबने | धथी भरेला सुवर्णकळशमा स्थापवाः--
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