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________________ ७५८ छक्खंडागमे वग्गणा-खंड [५, ४, ३३१ जहण्णपदेण ओरालियसरीरस्स जहणियाए हिदीए पदेसग्गं सव्वपदेसगस्स केवडियो भागो ? ॥ ३३१ ॥ असंखेज्जदिभागो ॥ ३३२ ॥ जघन्यपदकी अपेक्षा औदारिकशरीरकी जघन्य स्थिति सम्बन्धी प्रदेशाग्र सब प्रदेशा ग्रके कितने भाग प्रमाण है ? ॥ ३३१ ॥ वह उसके असंख्यातवें भाग प्रमाण है ॥ ३३२ ॥ एवं चदुण्णं सरीराणं ॥ ३३३॥ इसी प्रकार शेष चार शरीरोंके भागाभागको भी जानना चाहिए ॥ ३३३ ।। उक्कस्सपदेण ओरालियसरीरस्स उक्कस्सियाए द्विदीए पदेसग्गं सव्वपदेसग्गस्स कवडिओ भागो ? ॥ ३३४ ॥ असंखेज्जदिभागो ।। ३३५ ॥ उत्कृष्ट पदकी अपेक्षा औदारिकशरीरकी उत्कृष्ट स्थितिका प्रदेशाग्र सब प्रदेशाग्रके कितनेवें भाग प्रमाण है ? ॥ ३३४ ॥ वह उसके असंख्यातवें भाग प्रमाण है ॥ ३३५ ॥ एवं चदुण्णं सरीराणं ॥ ३३६ ॥ इसी प्रकार शेष चार शरीरोंके भी भागाभागकी प्ररूपणा जानना चाहिए ॥ ३३६ ॥ अजहण्ण-अणुक्कस्सपदेण ओरालियसरीरस्स अजहण्ण-अणुक्कस्सियाए द्विदीए पदेसग्गं सबढिदिपदेसग्गस्स केवडिओ भागो ? ।। ३३७ ।। असंखेज्जाभागा ॥ ३३८ ॥ अजघन्य-अनुत्कृष्टपदकी अपेक्षा औदारिकशरीरकी अजघन्य-अनुत्कृष्टस्थितिका प्रदेशाग्र सब स्थितियोंके प्रदेशामके कितनेवें भाग प्रमाण है ? || ३३७ ॥ वह उसके असंख्यात बहुभाग प्रमाण है ॥ ३३८ ।। एवं चदुण्णं सरीराणं ॥ ३३९ ॥ इसी प्रकार शेष चार शरीरोंके अजघन्य-अनुत्कृष्ट स्थितिके प्रदेशाग्र सम्बन्धी भागाभाग जानना चाहिए ॥ ३३९ ॥ अप्पाबहुए त्ति तत्थ इमाणि तिण्णि अणियोगद्दाराणि- जहण्णपदे उक्कस्सपदे जहण्णुक्कस्सपदे ॥ ३४० ॥ अल्पबहुत्व अधिकारमें ये तीन अनुयोगद्वार हैं-- जघन्य पदविषयक, उत्कृष्ट पदविषयक और जघन्य-उत्कृष्ट पदविषयक ॥ ३४० ॥ जहण्णपदेण सव्वत्थोवा ओरालियसरीरस्स चरिमाए द्विदीए पदेसग्गं ॥ ३४१ ॥ जघन्यपदकी अपेक्षा औदारिकशरीरकी अन्तिम स्थितिका प्रदेशाग्र सबसे स्तोक है ।। पढमाए द्विदीए पदेसग्गमसंखेज्जगुणं ॥ ३४२ ॥ उससे प्रथम स्थितिमें निषिक्त प्रदेशाग्र असंख्यातगुणा है || ३४२ ॥ अपढम-अचरिमासु द्विदीसु पदेसग्गमसंखेज्जगुणं ॥ ३४३ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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