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________________ ७३२] छक्खंडागमे वग्गणा-खंडं [५, ३, ६८ ३. बंधणिज्जाणियोगगद्दारं जं तं बंधणिज्जं णाम तस्स इममणुगमणं कस्सामो वेदणअप्पा पोग्गल्ला, पोगल्ला खंध समुद्दिट्ठा, खंधा वग्गणसमुट्टिट्ठा ।। ६८ ॥ ___ जो वह बन्धनीय है उसका इस प्रकार अनुगमन करते हैं- वेदनास्वरूप पुद्गल हैं, वे वेदनास्वरूप पुद्गल स्कन्धस्वरूप हैं, और वे स्कन्ध वर्गणास्वरूप हैं ॥ ६८ ॥ वग्गणाणमणुगमणद्वदाए तत्थ इमाणि अट्ठ अणिओगद्दाराणि णादव्वाणि भवंतिवग्गणा वग्गणदव्वसमुदाहारो अणंतरोवणिधा परंपरोवणिधा अवहारो जवमझं पदमीमांसा अप्पाबहुए त्ति ॥ ६९॥ वर्गणाओंका परिज्ञान कहनेमें प्रयोजनीभूत अनुयोगद्वार ज्ञातव्य हैं- वर्गणा, वर्गणा द्रव्यसमुदाहार अनन्तरोपनिधा, परम्परोपनिधा, अवहार, यवमध्य, पदमीमांसा और अल्पबहुत्त्व ॥६९॥ ___ अब उक्त आठ अनुयोगद्वारोंमें प्रथम वर्गणाकी प्ररूपणामें प्रयोजनीभूत सोलह अनुयोगद्वारोंका निर्देश करते हैं वग्गणा त्ति तत्थ इमाणि वग्गणाए सोलस अणिओगद्दाराणि- वग्गणणिक्खेवे वग्गणणयविभासणदाए वग्गणपरूवणा वग्गणणिरूवणा, वग्गणधुवाधुवाणुगमो वग्गणसांतरणिरंतराणुगमो वग्गणओजजुम्माणुगमो वग्गणखेत्ताणुगमो वग्गणफोसणाणुगमो वग्गणफोसणाणुगमो वग्गणकालाणुगमो वग्गणअंतराणुगमो वग्गणभावाणुगमो वग्गणउवणयणाणुगमो वग्गणपरिमाणाणुगमो वग्गणभागाभागाणुगमो वग्गणअप्पाबहुए ति ॥ ७० ॥ अब वर्गणाका प्रकरण है । उसके विषयमें ये सोलह अनुयोगद्वार ज्ञातव्य हैं- वर्गणानिक्षेप, वर्गणानयविभाषणता, वर्गणाप्ररूपणा, वर्गणानिरूपणा, वर्गणाध्रुवाधुवानुगम, वर्गणासान्तरनिरन्तरानुगम वर्गणाओज-युग्मानुगम, वर्गणाक्षेत्राणुगम, वर्गणास्पर्शानानुगम, वर्गणाकालानुगम, वर्गणाअन्तरानुगम वर्गणाभावानुगम, वर्गणाउपनयनानुगम, वर्गणापरिमाणानुगम, वर्गणाभागाभागानुगम और वर्गणाअल्पबहुत्त्वानुगम ॥ ७० ॥ वग्गणणिक्खेवे त्ति छबिहे वग्गणणिक्खेवे-णामवग्गणा दुवणवग्गणा दव्ववग्गणा खेत्तवग्गणा कालवग्गणा भाववग्गणा चेदि ॥ ७१ ॥ उक्त सोलह अनुयोगद्वारोंमें क्रमश: वर्गणानिक्षेपका प्रकरण है । वह वर्गणानिक्षेप छह प्रकारका है- नामवर्गणा, स्थापनावर्गणा, द्रव्यवर्गणा, क्षेत्रवर्गणा, कालवर्गणा और भाववर्गणा ||७१॥ ___ वग्गणणयविभासणदाए को गओ काओ वग्गणाओ इच्छदि ? णेगम-चवहारसगहा सव्वाओ ॥ ७२ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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