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________________ ४, २, १४, ३९ / वेयणमहाहियारे वेयणपरिमाणविहाणं [ ६८१ ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय और अन्तराय कर्मकी कितनी प्रकृतियां हैं ? ॥ २५ ॥ ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय और अन्तराय कर्मकी एक एक प्रकृति तीस कोड़ाकोड़ि सागरोपमोंको समय प्रबद्धार्थसे उक्त तीन गुणित करनेपर जो प्राप्त हो उतनी है ॥ २६ ॥ उक्त तीन कर्मोकी इतनी मात्र प्रकृतियां हैं ॥ २७ ॥ कर्म स्थितिके प्रथम समयमें बांधे गये कर्मस्कन्धका नाम एक समयप्रबद्धार्थता है; द्वितीय समयमें बांधे गये कर्मस्कन्धका नाम द्वितीय समयप्रबद्धार्थता है । इस प्रकार कर्मस्थितिके अन्तिम समय तक ले जाना चाहिये । फिर एक समयप्रबद्धार्थताको स्थापित कर तीस कोडाकोडी सागरोपमसे गुणित करनेपर एक एक कर्मकी इतनी प्रकृतियां होती है । - aritrea कम्म केवडियाओ पयडीओ ? ।। २८ ।। वेयणीयस्स कम्मस्स एका पडी तीसंपणार ससागरोव मकोडाकोडीओ समयपबद्धट्ठदाए गुणिदा ॥ २९ ॥ एवडियाओ पयडीओ ॥ ३० ॥ वेदनीय कर्मकी कितनी प्रकृतियां हैं ? ॥ २८ ॥ तीस और पन्द्रह कोड़ाकोडि सागरोपमोंके समयप्रबद्धार्थ से गुणित करनेपर जो प्राप्त हो उतनी मात्र वेदनीय कर्मकी एक एक प्रकृति हैं ॥ २९ ॥ उसकी इतनी प्रकृतियां हैं ॥ ३० ॥ मोहणीयस कम्मस्स केवडियाओ पयडीओ ? ।। ३१ ।। मोहणीयस्स कम्मस्स एकेका पयडी सत्तरि चत्तालीसं वीसं पण्णारसदससागरोवमकोडाकोडीयो समयपबद्ध दाए गुणिदा ।। ३२ ।। एवडियाओ पयडीओ ॥ ३३ ॥ मोहनीय कर्मी कितनी प्रकृतियां है ? ॥ ३१ ॥ सत्तर, चालीस, बीस, पन्द्रह और दस कोड़ाकोड़ि सागरोंपमोंके समयबद्धार्थतासे गुणित करनेपर जो प्राप्त हो उतनी मोहनीय कर्मकी M • एक एक प्रकृति है ॥ ३२ ॥ उसकी इतनी प्रकृतियां है ॥ ३३ ॥ आउ कम्मस्स केवडियाओ पयडीओ १ ।। ३४ ।। आउअस्स कम्मस्स एकेका पयडी अंतोमुहुत्तमतोमुहुत्तं समयपबद्धट्टदाए गुणिदा ॥ ३५ ॥ एवडियाओ पडीओ || ३६ || आयु कर्मकी कितनी प्रकृतियां है ? ॥ ३४ ॥ अन्तर्मुहूर्त अन्तर्मुहूर्तको समयप्रबद्धार्थतासे गुणित करने पर जो प्राप्त हो उतनी आयु कर्मकी एक एक प्रकृति है ॥ ३५ ॥ उसकी इतनी प्रकृतियां है ॥ ३६ ॥ णामस्स कम्मस्स केवडियाओ पयडीओ ? ।। ३७ ।। णामस्स कम्मस्स एकेका पडी वीसं, अट्ठारस, सोलस, पण्णा रस, चोइस, बारस, दससागरोवम कोडाकोडीयो समयपबद्धदाए गुणिदाए ।। ३८ ।। एवडियाओ पयडीओ ।। ३९ ।। छ. ८६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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