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________________ ४, २, १०, २५] वेयणमहाहियारे वेयणवेयणविहाणं [६४७ सिया बज्झमाणियाओ च उदिण्णाओ च ॥ १२ ॥ वह कथंचित् बध्यमान और उदीर्ण अनेक वेदनाओंरूप है ॥ १२ ॥ सिया बज्झमाणिया च उवसंता च ॥ १३ ॥ वह कथंचित् बध्यमान और उपशान्त वेदना है ॥ १३ ॥ सिया बज्झमाणिया च उवसंताओ च ॥१४॥ वह कथंचित् बध्यमान एक और उपशान्त अनेक वेदनाओंरूप है ॥ १४ ॥ सिया बज्झमाणियाओ च उवसंता च ॥१५॥ वह कथंचित् बध्यमान अनेक और उपशान्त एक वेदना है ॥ १५ ॥ सिया बज्झमाणियाओ च उपसंताओ च ॥ १६ ॥ वह कथंचित् बध्यमान अनेक और उपशान्त अनेक वेदनाओंरूप है ॥ १६ ॥ सिया उदिण्णा च उवसंता च ॥१७॥ वह कथंचित् उदीर्ण और उपशान्त वेदना हैं ॥ १७ ॥ सिया उदिण्णा च उवसंताओ च ॥ १८ ॥ वह कथंचित् उदीर्ण एक और उपशान्त अनेक वेदनाओंरूप है ॥ १८ ॥ सिया उदिण्णाओ च उवसंता च ॥ १९ ॥ वह कथंचित् उदीर्ण अनेक और उपशान्त एक वेदना है ॥ १९ ॥ सिया उदिण्णाओ च उवसंताओ च ॥ २० ॥ वह कथंचित् उदीर्ण अनेक और उपशान्त अनेक वेदनाओंरूप है ॥ २० ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णा च उवसंता च ॥ २१ ॥ वह कथंचित् बध्यमान, उदीर्ण और उपशान्त वेदना है ॥ २१ ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णा च उवसंताओ च ॥ २२ ॥ वह कथंचित् बध्यमान व उदीर्ण एक तथा उपशान्त अनेक वेदनाओंरूप है ॥ २२ ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णाओ च उवसंता च ॥ २३ ॥ वह कथंचित् बध्यमान एक, उदीर्ण अनेक और उपशान्त एक वेदना है ॥ २३ ॥ सिया बज्झमाणिया च उदिण्णाओ च उवसंताओ च ॥ २४ ॥ वह कथंचित् बध्यमान एक तथा उदीर्ण और उपशान्त अनेक वेदनाओंरूप है ॥२४॥ सिया बज्झमाणियाओ च उदिण्णा च उवसंता च ॥ २५ ॥ वह कथंचित् बध्यमान अनेक तथा उदीर्ण और उपशान्त एक वेदना है ।। २५ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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