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________________ ५८८ ] छक्खंडागमे वेयणाखंडं [ ४, २, ६, ७३ चतुरिन्द्रिय अपर्याप्तकके संक्लेश-विशुद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ ५९ ॥ चउरिंदियपज्जत्तयस्स संकिलेस - विसोहिडाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ ६० ॥ चतुरिन्द्रिय पर्याप्त के संक्केश-विशुद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ ६० ॥ असण्णिपंचिंदियअपज्जत्तयस्स संकिलेस - विसोहिद्वाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ ६१ ॥ असंज्ञी पंचेन्द्रिय अपर्याप्तक के संक्लेश-विशुद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ ६१ ॥ असणिपंचिंदियपज्जत्तयस्स संकिलेस - विसोहिद्वाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ ६२ ॥ असंज्ञी पंचेन्द्रिय पर्याप्तकके संक्लेश-विशुद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ ६२ ॥ सण्णिपंचिंदिय अपज्जत्तयस्स संकिलेस - विसोहिद्वाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ ६३ ॥ संज्ञी पंचेन्द्रिय अपर्याप्तकके संक्लेश-विशुद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ ६३॥ सण्णिपंचिंदिय पज्जत्तयस्स संकिलेस - विसोहिद्वाणाणि असंखेज्जगुणाणि ॥ ६४ ॥ संज्ञी पंचेन्द्रिय पर्याप्तकके संक्लेश-विशुद्धिस्थान असंख्यातगुणे हैं ॥ ६४ ॥ सव्वत्थोवो संजदस्स जहण्णओ ट्ठदिबंधो ॥ ६५ ॥ संयत जीवका जघन्य स्थितिबन्ध सबसे स्तोक है ॥ ६५ ॥ बादरेइंदियपज्जत्तयस्स जहण्णओ ट्ठिदिबंधो असंखेज्जगुणो ।। ६६ ।। उससे बादर एकेन्द्रिय पर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध असंख्यातगुणा है ॥ ६६ ॥ सुहुमे इंदिय पज्जत्तयस्स जहण्णओ ट्ठिदिबंधो विसेसाहियो ॥ ६७ ॥ उससे सूक्ष्म एकेन्द्रिय पर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ॥ ६७ ॥ बादरेइंदिय अपज्जत्तयस्स जहण्णओ द्विदिबंधो विसेसाहिओ ।। ६८ ।। उससे बादर एकेन्द्रिय अपर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ॥ ६८ ॥ सुहुमेइंदियअपज्जत्तयस्स जहण्णओ डिदिबंधो विसेसाहिओ ।। ६९ ।। उससे सूक्ष्म एकेन्द्रिय अपर्याप्तकका जघन्य स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ॥ ६९ ॥ तस्सेव अपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ द्विदिबंधो विसेसाहिओ ।। ७० ।। उससे उसीके अपर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ॥ ७० ॥ बादरेइंदियअपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ द्विदिबंधो विसेसाहिओ ॥ ७१ ॥ बादर एकेन्द्रिय अपर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ॥ ७ #1 सुमेइंदियपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ द्विदिबंधो विसेसाहिओ ॥ ७२ ॥ सूक्ष्म एकेन्द्रिय पर्याप्तकका उत्कृष्ट स्थितिबन्ध विशेष अधिक है ।। ७२ । बादरेइंदियपज्जत्तयस्स उक्कस्सओ द्विदिबंधो विसेसाहिओ ।। ७३ ।। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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