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________________ २, ७, ६२ ) फोसणाणुगमे इंदियमग्गणा [ ४२१ इन्द्रियमार्गणाके अनुसार एकेन्द्रिय, एकेन्द्रिय पर्याप्त, एकेन्द्रिय अपर्याप्त, सूक्ष्म एकेन्द्रिय, सूक्ष्म एकेन्द्रिय पर्याप्त और सूक्ष्म एकेन्द्रिय अपर्याप्त जीव स्वस्थान, समुद्धात व उपपाद पदोंकी अपेक्षा कितना क्षेत्र स्पर्श करते हैं ? ॥ ४९ ॥ उक्त पदोंसे वे सर्व लोक स्पर्श करते हैं ॥ ५० ॥ बादरेइंदिया पज्जत्ता अपज्जत्ता सत्थाणेहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? ॥५१॥ लोगस्स संखेज्जदिभागो ॥ ५२ ॥ ___ बादर एकेन्द्रिय, बादर एकेन्द्रिय पर्याप्त और बादर एकेन्द्रिय अपर्याप्त जीव स्वस्थान पदोंकी अपेक्षा कितना क्षेत्र स्पर्श करते हैं ? ॥ ५१ ॥ उपर्युक्त जीव स्वस्थान पदोंसे लोकका संख्यातवां भाग स्पर्श करते हैं ॥ ५२ ॥ समुग्धाद-उववादेहि केवडियं खेतं फोसिदं ? ॥ ५३ ॥ सबलोगो ॥ ५४ ॥ समुद्घात व उपपादकी अपेक्षा उक्त जीवों द्वारा कितना क्षेत्र स्पृष्ट है ? ॥ ५३ ॥ समुद्घात व उपपादकी अपेक्षा उनके द्वारा सर्व लोक स्पृष्ट है ॥ ५४ ॥ बीइंदिय-तीइंदिय-चउरिंदियपज्जत्तापज्जत्ताणं सत्थाणेहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? ॥ ५५ ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागो ॥५६॥ द्वीन्द्रिय, द्वीन्द्रिय पर्याप्त, द्वीन्द्रिय अपर्याप्त, त्रीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय पर्याप्त, त्रीन्द्रिय अपर्याप्त, चतुरिन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय पर्याप्त और चतुरिन्द्रिय अपर्याप्त जीवोंके द्वारा स्वस्थान पदोंसे कितना क्षेत्र स्पृष्ट है ? ॥ ५५ ॥ उपर्युक्त जीवों द्वारा स्वस्थान पदोंसे लोकका असंख्यातवां भाग स्पृष्ट है । समुग्धाद-उववादेहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? ॥ ५७ ॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागो सव्वलोगो वा ॥ ५८॥ ___ समुद्घात व उपपाद पदकी अपेक्षा उक्त जीवों द्वारा कितना क्षेत्र स्पृष्ट है ? ॥ ५७ ॥ समुद्धात व उपपादकी अपेक्षा उनके द्वारा लोकका असंख्यातवां भाग अथवा सर्व लोक स्पृष्ट है ॥ __पंचिंदिय-पंचिंदियपज्जत्ता सत्थाणेहि केवडियं खत्तं फोसिदं? ॥५९॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागो अट्ट-चोद्दसभागा वा देसूणा ॥ ६०॥ पंचेन्द्रिय और पंचेन्द्रिय पर्याप्त जीव स्वस्थान पदोंसे कितने क्षेत्रका स्पर्श करते हैं ? ॥ ५९ ॥ उपर्युक्त जीव स्वस्थान पदोंसे लोकका असंख्यातवां भाग अथवा कुछ कम आठ बटे चौदह भाग स्पर्श करते हैं ।। ६० ॥ समुग्धादेहि केवडियं खेत्तं फोसिदं ? ॥६१॥ लोगस्स असंखेज्जदिभागो अट्ठ-चोदसभागा वा देसूणा असंखेज्जा वा भागा सबलोगो वा ।। ६२ ॥ पंचेन्द्रिय और पंचेन्द्रिय पर्याप्तोंके द्वारा समुद्घातोंकी अपेक्षा कितना क्षेत्र स्पृष्ट है ? ॥ ६१ ॥ समुद्घातोंकी अपेक्षा उनके द्वारा लोकका असंख्यातवां भाग, कुछ कम आठ बटे चौदह भाग, अथवा असंख्यात बहुभाग, अथवा सर्व लोक स्पृष्ट है ॥ ६२ ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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