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________________ १, ८, २१ ] अप्पा बहुगागमे ओघणिद्देसो पमत्त संजदा संखेज्जगुणा ॥ ९ ॥ अप्रमत्तसंयतोंसे प्रमत्तसंयत संख्यातगुणित हैं ॥ ९ ॥ संजदासंजदा असंखेज्जगुणा ॥ १० ॥ प्रमत्तसंयतोंसे संयतासंयत असंख्यातगुणित हैं ॥ १० ॥ सासणसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ ११ ॥ संयतासंयतोंसे सासादन सम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणित हैं ॥ ११ ॥ सम्मामिच्छादिट्ठी संखेज्जगुणा ॥ १२ ॥ सासादनसम्यग्दृष्टियों से सम्यग्मिथ्यादृष्टि जीव संख्यातगुणित हैं ॥ १२ ॥ असंजद सम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ १३ ॥ सम्यग्मिथ्यादृष्टियोंसे असंयतसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ १३ ॥ मिच्छादिट्ठी अनंतगुणा ॥ १४ ॥ असंयतसम्यग्दृष्टियोंसे मिध्यादृष्टि जीव अनन्तगुणित हैं ॥ १४ ॥ असजद सम्मादिट्ठिट्ठाणे सव्वत्थोवा उवसमसम्मादिट्ठी ॥ १५ ॥ असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थानमें उपशमसम्यग्दृष्टि जीव सबसे कम हैं ॥ १५ ॥ खइयसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ १६ ॥ असंयतसम्यग्दृष्टि गुणस्थानमें उपशमसम्यग्दृष्टियोंसे क्षायिकसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यात - गुण हैं ॥ १६ ॥ वेद सम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ १७ ॥ असंयत सम्यग्दृष्टि गुणस्थानमें क्षायिकसम्यग्दृष्टियोंसे वेदकसम्यग्दृष्टि जीव असंख्यातगुणित हैं ॥ १७॥ संजदासंजदट्ठाणे सवत्थोवा खइयसम्मादिट्ठी ॥ १८ ॥ संयतासंयत गुणस्थान में क्षायिकसम्यग्दृष्टि जीव सबसे कम हैं ॥ १८ ॥ उवसमसम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा ॥ १९ ॥ [ २२९ Jain Education International संयतासंयत गुणस्थानमें क्षायिकसम्यग्दृष्टियोंसे उपशमसम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणित हैं ॥१९ वेद सम्मादिट्ठी असंखेज्जगुणा || २० || संयतासंयत गुणस्थानमें उपशमसम्यग्दृष्टियोंसे वेदकसम्यग्दृष्टि असंख्यातगुणित हैं ||२०|| पमत्तापमत्त संजदट्ठाणे सव्वत्थोवा उवसमसम्मादिट्ठी ॥ २१ ॥ प्रमत्तसंयत और अप्रमत्तसंयत गुणस्थानोंमें उपशमसम्यग्दृष्टि जीव सबसे कम हैं ॥ २१ ॥ For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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