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________________ १, ५, १२१] कालाणुगमे इंदियमग्गणा [ १४५ बादर एकेन्द्रिय जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा सर्व काल होते हैं । एगजीवं पडुच्च जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं ॥ १११ ॥ एक जीवकी अपेक्षा बादर एकेन्द्रिय जीवोंका जघन्य काल क्षुद्रभवग्रहण प्रमाण है ॥१११॥ उक्कस्सेण अंगुलस्स असंखेज्जदिभागो असंखेज्जासंखेज्जाओ ओसप्पिणिउस्सप्पिणीओ ॥ ११२ ॥ एक जीवकी अपेक्षा बादर एकेन्द्रिय जीवोंका उत्कृष्ट काल अंगुलके असंख्यातवें भाग प्रमाण असंख्यातासंख्यात अवसर्पिणी और उत्सर्पिणी प्रमाण है ॥ ११२ ॥ बादरेइंदियपजत्ता केवचिरं कालादो होति ? णाणाजीवं पडुच्च सव्वद्धा ॥११३ बादर एकेन्द्रिय पर्याप्त जीव कितने काल होते हैं ! नाना जीवोंकी अपेक्षा सर्व काल होते हैं ॥ ११३ ॥ एगजीवं पडुच्च जहण्णेण अंतोमुहुत्तं ॥ ११४ ॥ एक जीवकी अपेक्षा बादर एकेन्द्रिय पर्याप्त जीवोंका जघन्य काल अन्तर्मुहूर्त है ॥११४॥ उक्कस्सेण संखेज्जाणि वाससहस्साणि ॥ ११५ ॥ एक जीवकी अपेक्षा बादर एकेन्द्रिय पर्याप्तक जीवोंका उत्कृष्ट काल संख्यात हजार वर्ष है ।। बादरेइंदियअपजत्ता केवचिरं कालादो होंति ? णाणाजीवं पडुच्च सम्बद्धा ।। बादर एकेन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तक जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा सर्व काल होते हैं ॥ ११६॥ एगजीवं पडुच्च जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं ॥ ११७ ॥ एक जीवकी अपेक्षा बादर एकेन्द्रिय लब्ध्यपर्याप्तक जीवोंका जघन्य काल क्षुद्रभवग्रहण प्रमाण है ॥ ११७॥ उक्कस्सेण अंतोमुहुत्तं ॥ ११८ ॥ एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है ॥ ११८ ॥ सुहुमएइंदिया केवचिरं कालादो होति ? णाणाजीवं पडुच्च सव्वद्धा ॥ ११९ ॥ सूक्ष्म एकेन्द्रिय जीव कितने काल होते हैं ? नाना जीवोंकी अपेक्षा सर्व काल होते हैं। एगजीवं पडुच्च जहण्णेण खुद्दाभवग्गहणं ॥ १२० ॥ एक जीवकी अपेक्षा उक्त जीवोंका जघन्य काल क्षुद्रभवग्रहण प्रमाण है ॥ १२०॥ उक्कस्सेण असंखेज्जा लोगा ॥ १२१ ॥ उक्त जीवोंका उत्कृष्ट काल असंख्यात लोक प्रमाण है ॥ १२१ ॥ छ. १९ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600006
Book TitleShatkhandagam
Original Sutra AuthorPushpadant, Bhutbali
Author
PublisherWalchand Devchand Shah Faltan
Publication Year1965
Total Pages966
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationManuscript
File Size20 MB
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