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________________ दिगंबर जैन । उपदेशकोंकी पोशाक-अन्य समाजकी हमारा विचार 'दिगम्बर जैन' का सचित्र खास भांति जैनसमाजकी तरफसे ता जीवदया सभा अंक प्रकट करनेका निश्चित रूपसे है इप्सलिये महारनकी तरफसे भी अहिंसा प्रचारार्थ उपदेशक हमारे सुज्ञ लेखकोंको हम अभीसे आमंत्रण भ्रमण करते हैं । जनतामें नुक्तेचीनीका परीक्षा- करते हैं कि वे हिंदी, संस्कृत, गुजराती, मराठी प्रधानगुण बढ़ता जाता है और कोट, बूट, फेल्ट व अंग्रेजी भाषा के उपयोगी लेख शीघ्र ही केप, सीपके बटन, उनका तथा विदेशी वस्त्र तैयार करके भेनें व कोई भाई अपकट प्राचीन मादि व्याख्यानदाताओंको नहीं पहिरने चाहिये तीर्थोके, संस्थाओंके ब प्रसिद्ध दानी धर्मात्माइससे जनसाधारण पर व्याख्यानका असर न ओंके चित्र व परिचय भेजेंगे तो उनको भी होकर उनकी मजाक उड़ाई जाती है। कई सहर्ष स्थान दिया जायगा। इस वर्ष भी करीब उपदेशक अंग्रेजी बाल रखा लेते हैं, श्रृंगार १००-१२५ पृष्ठका खास अंक निकालनेका करते हैं, रे, तू , छि, लानत, अफसोस, धिक्कार, हमारा इरादा है। भाशा है हमारे लेखकगण आदि कड़े शब्दोंका जनता पर सभामें प्रयोग व ग्राहकगण हमें इस कार्यमें अवश्य सहायक करते हैं। इससे शिक्षित समानकी दृष्टिमें होंगे। उनकी ग्रामीणता प्रगट होती है इसलिये ऐसा आखका वैद्यक शर्तिया इलाज मुफ्तनहीं करना चाहिये। जैन समाज पार्मिक स. वैद्यभूषण कृष्णवदनी बाईकी मंडी "आगरा" माज है। कई व्याख्याता भंग पीते, विना छना आंख का हरप्रकारका इलाज विना फीस करते हैं। जलसे स्नान आदि करते, बानारका भोजन करते. कई बड़े अस्पताल और सिविल सर्जनके जवाब अष्टमी, चतुर्दशीको भी पान आदि हरी खाते, दिये हुए मरीजोंको आपने बिलकुल फायदा आलू, गाजर आदि कंदमूल, गोमी, क्थुआ, कर दिया है, उनके मकानपर दवा लेने और आदिका साग खाते हैं, जिससे भी जैन जनता तस्दी कराने जाता है उससे न फीस और न पर उनका प्रभाव नहीं पड़ता है। अतएव उप- दवाकी कीमत लेते हैं । मकान पर भी फीस देना देशकोंको सब प्रकारसे स्वदेशी वस्त्र-अपने भावश्यक नहीं हैं आप एक अच्छे क्षत्रीवंशके देशकी पोशाक पहिनते हुए, अभक्ष भक्षण धनवान व्यक्ति हैं । परोपकारार्थ सच्चे दिलसे मादिसे सदा बचना चाहिये और जनसाधार सेवा करते हैं। मुझे आंखके रोहों को एक अंग्रेज णसे अपने भीतर एक असाधारणता पैदा करना भ० सर्जनने जवाब दे दिया था, आपने दो चाहिये जिससे अमीर गरीबाप्तवपर प्रभाव पडे। हप्तोंमें बिलकुल ठीककर दिया। बाबूराम मंत्री जीवदया अहारन । बाबूराम मंत्री जीवदया अहारन | सचित्र खास अंक-आगामी वीरनिर्वाण संवत २४२०के प्रारम्भमें भी प्रतिवर्षकी भांति
SR No.543189
Book TitleDigambar Jain 1923 Varsh 16 Ank 11
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMulchand Kisandas Kapadia
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1923
Total Pages36
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Digambar Jain, & India
File Size10 MB
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