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उसको उच्चारण कराने का प्रयत्न करीब २ निष्फल गया. सिर्फ वह 'लेइट' शब्द बोल सकता था। यह कुछ अस्पष्टता से इस शब्द के साथ अपनी खुराक वस्तु का विचार जोड़ता था। जब इटार्ड को इसके बोलने के बारे में असफलता मालूम हुई तब उसने छापे हुए और लिखे हुए शब्दों के साथ अर्थ को जोड़ने सिखाने का प्रयत्न किया । उसने एक पुढे पर लाल गोलाकार वर्तुल, भूरा त्रिकोन के काले चौसर की आकृति चिपका दी और इसी कद, आकार
और रंग की आकृतियों को कार्ड बोर्ड के पुढे की बनाई । फिर कटी हुई आक. तिय पुढे पर चिपकी हुई प्राकृतियों पर रखने का काम कराया गया। वह जंगली ऐसा करना सीखा। इस काम में नये २ फेरफार किये जाते तो कभी २ आकार
और रंग के असल सम्बन्ध में फेरफार कर दिया जाता था। इस कार्य के बाद उस लड़के को २४ खानों वाली पेटी दी जाती थी और हर एक खाने में मृलाक्षर का एक २ अक्षर कार्ड बोर्ड के पूढे के चौरस टुकड़े पर छपा हुआ था। इसके साथ ही इससे मिलती धातु के अक्षर रक्खे जाते थे। लड़के को पुढे के अक्षरों पर धातु के अक्षर रखना आगया। प्रथम ही प्रथम उसने 'लेइट' जोड़ा। परन्तु उसमें बहुत से अर्थ रखता था जैसे कि दध को देखते पीने की इच्छा दर्शाकर, दूध रखने का बर्तन देखते "लेइट" शब्द के साथ सम्बन्ध को दर्शाना भादि । इसके बाद इटार्ड ने लेइट' शब्द का खयाल अधिक स्पष्ट करने को दूसरे अधिक प्रयोग किये । उसने पेन, कुञ्जी और चाकू को एक मेज पर रखा और उस हर एक के नीचे उनके नाम के छपे हुये काई रक्खे । . लड़के को पदार्थों के साथ शब्द को कैसे जोड़ना आदि सिखाये बाद पदार्थों का मिश्रण एक कोने में करके रक्खा और दूसरे कमरे में बैठ कर कार्ड दिये और उसके माफिक पदार्थ मंगाने का खेल शुरू किया। यह खेल शुरू ही शुरू में जंगली को कठिन मालूम हुआ परन्तु आखिरकार वह सीख गया । इसके बाद पदार्थों को दूसरे कमरे में रक्खे और मंगाये। इस तरह फतेहमन्दी से कार्य बहुत दिनों तक चला। .एक दिन इटार्ड ने प्रयोगों में जरा फेर-फार किया उसने खेलों में काम में आने वाले पदार्थों के माफिक दूसरे पदार्थ उनके बजाय रक्खे और कार्ड देकर कार्ड में लिखे अनुसार पदार्थ लाने को कहा। परन्तु जंगली के ध्यान में