SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 202
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ वीर सेवा मंदिर अनेकान्त का त्रैमासिक प्रवत्तक : आ. जुगलकिशोर मख्तार 'यगवीर' इस अक में कहाँ/क्या? वर्ष- 60, किरण-4 अक्तुबर-दिसम्बर 2007 सम्पादक: | डॉ. जयकुमार जैन ।।। 429, पटल नगर मुजफ्फरनगर ( उ प्र.) फोन (03) 16037301 1 अध्यात्मपद कविवर दोलत गम जी ? सम्पादकीय । श्री मूलाचार की दृष्टि मे एकल विहार एव अनियत विहार रतनलाल वैनाडा मस्था की मरक्षक मदम्यता 5100101 आजीवन सदस्यता 4 तत्वार्थसूत्र मे गुणव्रत डॉ जयकमार जन । वार्षिक सदस्यता 15 श्रावकाचार और रात्रि भोजन विरमण व्रत डॉ अशाक कुमार जेन 4 || इम अक का मल्य भक्तामर स्तोत्र में रस और अलकागे की योजना डा फुलचन्द्र जन प्रमी 53 गदग्या व मंदिरों के लिए नि.शुल्क प्रकाशक . यह सप्तरंगी अभिषेक कहा से आया? - पानाचन्द जन पूर्व जरिम जयपुर भारतभूषण जैन, पटाकर मुद्रक : मास्टर प्रिन्टर्म दिल्ली 321 विशेष सूचना : विद्वान् लेखक अपने विचारों के लिए स्वतन्त्र हैं। यह आवश्यक नहीं कि सम्पादक उनके विचारों में महमत हो। वीर सेवा मंदिर (जैन दर्शन शोध संस्थान) 21, दरियागंज, नई दिल्ली-110002, दूरभाष : 23250522 संस्था को दी गई सहायता राशि पर धारा 80-जी के अतर्गत आयकर में छूट (रजि आर 1059162)
SR No.538060
Book TitleAnekant 2007 Book 60 Ank 01 to 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaikumar Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year2007
Total Pages269
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size8 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy