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________________ 36 3. 4. 5. 6. 7. 8. सामायिक प्रतिमा प्रोषध प्रतिमा सचित्त त्याग प्रतिमा रात्रि भक्त प्रतिमा ब्रह्मचर्य प्रतिमा आरम्भ त्याग प्रतिमा परिग्रह त्याग प्रतिमा 9. 10. अनुमति त्याग प्रतिमा 11. उद्दिष्ट त्याग प्रतिमा अनेकान्त 60/3 इन प्रतिमाओं के छठे भेद को लेकर आचार्यों में मतभेद हैं। आ. समन्तभद्र ने छठी प्रतिमा को रात्रि भुक्ति विरत नाम दिया है । वह रात्रि में चारों प्रकार के आहार का त्याग करता है । चारित्र - पाहुड ( गाथा 21 ), प्राकृत पंच संग्रह ( 1 / 136 ), बारस अणुपेक्खा (गा. 69), गो. जीवकाण्ड (गा. 476) और वसुनन्दि श्रावकाचार में छठी प्रतिमा का नाम राइभत्ती ही है । महापुराण में ( पर्व 10 ) में दिवास्त्री संग त्याग नाम दिया है । सोमदेव के उपासकाचार में ( 853-854 श्लोक ) तीसरी प्रतिमा अर्चा, पॉचवीं प्रतिमा अकृषिक्रिया - कृषि कर्म न करना और आठवीं प्रतिमा सचित्त त्याग है । श्वेताम्बर आम्नाय में योगशास्त्र ( टीका 3 / 148 ), पॉचवीं प्रतिमा पर्व की रात्रि में कायोत्सर्ग करना, छठी प्रतिमा ब्रह्मचर्य, सातवीं प्रतिमा सचित्त त्याग, आठवीं प्रतिमा स्वयं आरम्भ न करना, नवमीं दूसरे से आरम्भ न कराना, दसवीं प्रतिमा उद्दिष्ट त्याग और ग्यारहवीं साधु की तरह निस्संग रहना, केशलोंच करना आदि है । यह अन्तर है । 1. दर्शन प्रतिमा जिसने (पूर्व अध्यायों में कहे गये) पाक्षिक श्रावक के आचार के आधिक्य से अपने निर्मल सम्यग्दर्शन को निश्चल बना लिया है, जो
SR No.538060
Book TitleAnekant 2007 Book 60 Ank 01 to 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaikumar Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year2007
Total Pages269
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size8 MB
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