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________________ 4 . 4. (क) यमान् सेवेत सततं न नियमान् केवलान् बुधः। यमान् पतत्यकुर्वाणो ...............।। मनुस्मृति 4/204 (ख) अहिंसासत्यास्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहाः। जातिदेशकालसमयानवच्छिन्नाः सार्वभौमाः महाव्रतम्। योगसूत्र 2/30-31 5 मूर्छापरिग्रह.।-तत्त्वार्थ सूत्र 7/17, दशवैकालिक 6/21 6 न जातु काम कामाना उपभोगेन शाम्यति। ___ हविषा कृष्णवर्मेव भूय एवाभिवर्धते।। मनुस्मृति 2194 7 यथा नदीनदाः सर्वे सामरे यान्ति संस्थितिम्। तथैवाश्रमिण सर्वे गृहस्थे यान्ति संस्थितिम्।। मनुस्मृति 6/90 8. अवश्यं यातारश्चिरतरमुषित्वाऋपि विषया, वियोगे को भेदस्त्यजति न जनो यत्स्वयममून्। व्रजन्तः स्वातन्त्र्यादतुलपरितापाय मनसः, म्वयं त्यक्ता ह्येते शमसुखमनंतं विदधति।। जैन तत्त्वमीमांसा पृ. 14 से उद्धृत 9. इंदियसेणा पसरइ मण-णरवइ-पेरिया ण संदेहो। तम्हा मणसंजमणं खवएण य हवदि कायव्यं। आराधनासार 58 10. आराधनासार, 60 11. इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऋनुविधीयते। तदस्य हरति प्रज्ञां वायु वमिवाम्भसि ।। श्रीमद्भगवद्गीता 2/67 12. जैन तत्त्वज्ञानमीमासा, पृ. 17 से उद्धृत। 13. (क) ध्यायतो विषयान्पुंस. संस्तेषूपजायते। संगात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऋभिजायते।। क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम.। स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति।। श्रीमद्भगवद्गीता 2/62-63 (ख) मनसश्चेन्द्रियाणा च यत्स्वस्वार्थे प्रवर्तनम्। यदृच्छयेव तत्त ज्ञा इन्द्रियासंयमाविदु. ।। जैन तत्त्वज्ञानमीमांसा पृ 13 से उद्धृत 14 क्षेत्रवास्तुहिरण्यसुवर्णधनधान्यदासीदासकुप्यप्रमाणातिक्रमाः । तत्त्वार्थसूत्र 7129 15. (क) मूलाचार 5/144, चारित्तपाहुड 36, आचारांग 2/15, समवायाग समवाय 25 (ख) मनोज्ञामनोज्ञेन्द्रियविषयरागद्वेषवर्जनानि पंच। तत्त्वार्थसूत्र 718 16. मूलाचार 5/210-211, भगवती आराधना 1118-1119, तत्त्वार्थसूत्र 7/29, 8/9 पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष 185, द्वारिकापुरी, मुजफ्फरनगर (उ.प्र.)-251001
SR No.538054
Book TitleAnekant 2001 Book 54 Ank 01 to 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJaikumar Jain
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year2001
Total Pages271
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Anekant, & India
File Size8 MB
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