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________________ 666666666666666666666 OOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOOooooooooooo OO भगवान महावीर पर मांसाहार के आरोप का प्रतिवाद ! श्रीन शासन (Busti) *१/१४ * 3२ *त.9-11-२००६ 0) शब्द सिंधु पृ० ८८१) खिलाई है । प्रसिद्ध टीकाकार... रॅवरॅन्ड (नाम मैं भूल OO मत्स्यपिता : मछली का पिता, एक प्रकार की वनस्पति गया हूँ) ने बाईबल की अपनी टीका में लिखा है कि ईसा OO) मंडूकी : मे ढकी, इस नाम की एक वनस्पति शहद के साथ टिड्डी खाते थे । यह पढ़कर मुझे लगा वि कुक्कुड : मुर्गा, इस नाम की वनस्पति-वैदक ग्रंथ टिड्डी क्या खाने की वस्तु है, जिसे ईसा शहद के साथ of कुकड : मुर्गी, अरिष्ट - बृहद निघंटु खाते होंगे ? अत: इस सम्बन्ध में मैं पादरी साहब lon 60) मांसफल : मांस का फल, खरबूजा - वैदक ग्रंथ मिला, तो उन्होंने बताया, "बाईबल में ही जब स्पष OD अंडा : अण्डा, आंवला - वैदक ग्रंथ उल्लेख है, तब अन्य विकल्प का स्थान ही नहीं रहता OD 0) अहिफन : सांप का फन, अफीम - बृहदनिघंटु शब्दों को ही पकड कर रहने वाले पंडितों को इस Oo नागजिहा : नाग की जीभ, पणशिल (फल) - अतिरिक्त अन्य सूझ ही क्या सकता है ? किन्तु मुई o बृहदनिघंटु इस प्रश्न ने बेचैन बना दिया । मेरा हृदय यह अर्थ CO Flesh - Hi Alleshy part of a fruit - Eng. Dic. स्वीकार करने का इन्कार करता था । अत: मैं प्रसिद्ध फल का मावा (गूदा) by J. Ogilvee P. 292 | विद्धानों के विभिन्न शब्दकोष देखने लगा तो, एक QO) एक दफा किसी तथाकथित सिरफरे पंडित ने पूर्व उस शब्द का अर्थ 'टिड्डी' के अतिरिक्त 'एक प्रकार का में भी भगवान् महावीर पर उक्त आगम पाठ को लेकर | फल' (जिसका नाम मैं याद नहीं रख सका हूँ) मिला| OD मांसाहार का आक्षेप लगा दिया था, इस संदर्भ में श्री उस फल के साथ आज भी शहद लिया जा सकता है | 00 रतिलाल मफाभाई शाह की सर्वोदयी नेता विनोबा जी अत: मैं उन रेवरॅन्ड साहब से पुन: मिला और मैंने OD से बात हुई, उन्होंने जो जवाब दिया वह आपके लिए फल का अर्थ ही ईसा के साथ अधिक सुसंगत है, या 00 मननीय है - समझाया । उन्होंने अपनी भूल को स्वीकार करके उHA "ऋषि मांस नहीं खाते थे ऐसा मैं नहीं मानता, नये अर्थ को मान्य रखा । पर तब तक तो यह भूल चलवी 00 ही रही। मतलब कि व्यक्ति के जीवन को समझे बिदा परन्तु भगवान महावीर का जीवन, उनके उपदेश सूक्ष्म उसके जीवन के साथ विसंगत अर्थ जोड देना ऐसे पुरुषी 0 अहिंसा क पालन तथा आत्यंतिक सत्य के लिए तनिक को बडा भारी अन्याय करने के बराबर है।" LOOD O भी चलित न होने की उनकी मनोवृत्ति देखते हुए, मैं जैन मुनि के लिए अनेक विशेषणों का प्रयोग 00 नि:संदेह मानता हूँ कि भगवान् महावीर कभी मांसाहार 00 कर ही नहीं सकते । मैं पंडितों के साथ चर्चा करना नहीं किया गया है, उनमें से एक विशेषण है lo चाहता, किन्तु उनके जीवन से विसंगत ऐसा अर्थ वे क्यों अमजमंसासि- (दशवै० सूत्र चूलिका २) अर्थात् 60) मद्य मांसादि अभक्ष्य पदार्थों का कदापि सेवन न कमी 0 जोड सकते होंगे, यह मेरी बुद्धि में ही नहीं उतरता । मैं वाला, जो अपने शिष्यों को मद्य मांसादि अभक्ष्य पदाी । o मानता हूँ कि यह शाब्दिक खेल का प्रश्न नहीं है, पर के सेवन के निषेध का विधान करे और स्वयं इसका 60) हृदय की सूझबूझ का प्रश्न है। यदि भगवान् महावीर में ० तनिक भी टि नजर आती, तो विश्वभर में अनन्य ऐसा सेवन करे, क्या यह आश्चर्यजनक बात कभी हो सकती है ? भगवान महावीर के संत तीन करण, तीन योग से OO) निरामिषाहारी जैनसंघ स्थापित करने की योग्य शक्ति हिसा के सम्पूर्ण त्यागी होते हैं। HD ही वे न प्राप्त कर सकते।" आपके उक्त आरोप के खंडन के लिए वैसे देने ab कुछ देर रुककर पुन: उन्होंने कहा - "हास्यास्पद | को सैकडों हेतु एवं प्रमाण हमारे पास हैं, किन्तु उनसेब OO बात तो यह है कि जिस प्रकार भगवान् महावीर के एकाद | को उद्धृत करने से पुस्तक का रुप बन जायगा, अतव 00 00 शब्द का आधार लेकर पंडितों ने उन्हें मुर्गे का मांस हमने मुख्य संदर्भ आपके विचारार्थ इस पत्र में दे दिये OO) खिलाया है, उसी प्रकार ईसाइयों ने ईसा को 'टिड्डी' हैं। कृपया इन पर गहनता से चिंतन मनन करें एवं अपनी CooooooooooooooooGAPOOooooooooooooooo Oooooooooooooooooo 11 boo ini pia inaire cooo ojo ojo (OJO
SR No.537266
Book TitleJain Shasan 2001 2002 Book 14 Ank 19 to 48
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPremchand Meghji Gudhka, Hemendrakumar Mansukhlal Shah, Sureshchandra Kirchand Sheth, Panachand Pada
PublisherMahavir Shasan Prkashan Mandir
Publication Year2001
Total Pages300
LanguageGujarati
ClassificationMagazine, India_Jain Shasan, & India
File Size19 MB
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