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________________ જૈન યુગ માર્ચ-એપ્રિલ ૧૯૬૦ १४ आकर्षण हो इसको ध्यान में रखकर कार्य करना चाहीये। इन सब का सारांश यह है के मन्त्री, पदाधिकारी, कार्यकारिणी के सदस्य, एवं स्टेन्डींग कमेटी के सदस्य, व अन्य जो भी समिति हो उनके सदस्य सब समय का भोग देकर परस्पर एकदील होकर काम करनेवाले हो। बहुत उदार विचारवाले हो, अपनी अपनी क्रिया करते हवे भी पक्षपात रहित सबके साथ प्रेम के साथ काम करनेवाले हो. तो सारी कमजोरीयां दुर होकर सरकारी, बीनसरकारी, उद्योगगृह, भोजनशाला, साहित्य, शिक्षण आदि के तमाम काम हो सकते है। अमुक नही करना ऐसा प्रश्न ही नही रहता है आर्थिक समस्या भी हल हो सकती है। मुख्य सारा आधार कार्यकर्ता पर निर्भर है। मेरी समज में जो आया वो लिखा है यदि अनुचित लिखा गया हो तो क्षमा करे। NEW Sanghavi TIFFIN CARRIER THE PATENT TIFFIN CARRIER SANGHAVICO 92,KANSARA CHAWL 110, SHIVAJI NAGAR BOMBAY 2 SURAJMAL K. SANGHAVI POONA 5 384,WETAL PETH POONA 2.
SR No.536284
Book TitleJain Yug 1960
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSohanlal M Kothari, Jayantilal R Shah
PublisherJain Shwetambar Conference
Publication Year1960
Total Pages154
LanguageGujarati
ClassificationMagazine, India_Jain Yug, & India
File Size11 MB
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