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________________ श्री जैन श्वेताम्बर एज्युकेशन बॉर्ड गोडीजी बिल्डिंग, पायधुनी, मुंबई नं. २ सुज्ञश्री: श्री जैन श्वेताम्बर एज्युकेशन बोर्ड जैन धर्म अने समाजना श्रेयार्थे धार्मिक शिक्षण प्रचारनी दिशामां जे सेवा बजावी रहेल छे तेनी संक्षिप्त माहितीस्वरुप आ निवेदन रजू करतां आनंद थाय छे. आपने विदित छे के श्री जैन श्वेताम्बर कोन्फरन्सना संवत् १९६५ मां पुनामां मळेल सातमा अधिवेशनमा व्यावहारिक अने धार्मिक केळवणीना प्रचार माटे एज्युकेशन बॉर्डनी स्थापना करवामां आवी इती. एकावन वर्षना आ समय दरम्यान आ संस्थाना प्रचारादिथी अनेक स्थळोए धार्मिक शिक्षण माटे पाठशाळाओ अथवा कन्याशाळाओ अस्तित्वमा आवी छे, जेमां विपुल संख्यामां बाळक-बालिकाओ जीवनना तत्त्वस्वरुप धार्मिक शिक्षण लेवा प्रेरायां छे. अने आ रीते संस्थानी मुख्य प्रवृत्ति धार्मिक शिक्षण प्रचार पर केन्द्रित थयेली छे. वर्षों अगाउ बॉर्डना प्रयासथी पाठशाळाओमां पद्धतिसर धर्मशिक्षण अपाय ते हेतुथी एक अभ्यासक्रमनी योजना घडवामां आवी, जेमां पूज्य मुनियों अने विद्वानोनी दोरवणीए मुख्य भाग भजव्यो. आ २४ धोरण युक्त अभ्यासक्रम बाळकथी मांडी वृद्ध स्त्रीपुरुषने धार्मिक ज्ञान माटे उपयोगी छे. अत्यारे भारतना भिन्न भिन्न प्रदेशोनी लगभग १२५ नानी मोटी पाठशाळाओमां आ अभ्यासक्रम चालु छे. तदनुसार दर वर्षे बॉर्ड तरफथी युनिवर्सिटीना धोरणे लेखित परीक्षाओ लेवाय छ, जेनो लाभ आशरे २००० विद्यार्थीओ ले छे अने तेमां उत्तीर्ण थनारने रु. २२५५] सुधीनां ईनामो आपवानी योजना करवामां आवेल छे. आ प्रवृत्ति विकसाववानी खूब जरुर छे. आजे पाठशाळाओ अने कन्याशाळाओनी संख्या वती रही छे अने तेमां एकसरखा अभ्यासक्रमनी योजना करवानी जरुर उपस्थित थई छे. तेनी साथे धार्मिक शिक्षण माटेना पुस्तको नूतन शैलीथी लखावी प्रसिद्ध कराववाना कार्यने पण पूरतो अवकाश छे. बोर्ड अत्यारे युनिवर्सिटीना धोरणे लेखित परीक्षाओ लई प्रमाणपत्रो अने ईनामो आपे छे. तेमां उत्तीर्ण थनारने धार्मिक शिक्षण क्षेत्रमा शिक्षक के शिक्षिका तरीके मान्य राखवामां आवे छे. ए एक महत्त्वनी सिद्धि लेखी शकाय. पण ज्यां सुधी संगीन भंडोळ न होय त्यां सुधी आ कार्यने विकसाववामां अने तेनी साथे संलग्न एवा पुस्तक प्रकाशनादिना कार्यने हाथ धरवानी जवाबदारी स्वीकारतां विचार कर्या विना चाले तेम नथी. आजे देशमां जैन धर्म अने समाजनी कसोटी थई रही छे. विश्वनी समस्याओनो उकेल धार्मिक शिक्षण उपर छे. मानवजीवननी खरी किंमत धर्मना अंगीकार अने आचरण उपर रहेली छे, जे माटे बोर्ड एक उत्तम साधनरुप संस्था छे. ते माटे ओछामा ओछा रु. १०,००० दशहजार तुरतमा मेळववा अमारी झंखना छे. तेने पोषण आपq ए समाजनुं प्राथमिक अने महत्त्वपूर्ण कर्तव्य छे. आपश्री. तेमां ओछामां ओछा रु. १०१] संस्थाने भेट आपी आ प्रवृत्तिने वेग आपशो एवी नम्र विनंति छे. आप रु. १०] मोकली आभारी करशोजी. लि. सेवक ता. ३१ मार्च १९६० चंदुलाल वर्धमान शाह मानद मंत्री mwww
SR No.536284
Book TitleJain Yug 1960
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSohanlal M Kothari, Jayantilal R Shah
PublisherJain Shwetambar Conference
Publication Year1960
Total Pages154
LanguageGujarati
ClassificationMagazine, India_Jain Yug, & India
File Size11 MB
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