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જૈન ધર્મ પ્રકાશ.
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और फिर इस धर्मके नेता और मुखीयाजी गवर्नमेंट अप्सरों कहा सुनी करें. तो आशा है कि थोका बहुत कुछ हो रहे साहस और परिश्रम करना चाहिये, हमको अपने दिल में यह जी दृढ विश्वास है कि जैन। सज्जनोंको इस पुयकार्यमें लगा हुआ देखकर बहुत हिंदु और कुछ सज्जन मुसलमान और पारसीजाइ जी उनके सहमत और सहायक हो जायेंगे ।
दयालु सम्राट् सप्तम एकवर्कका समय इस पुण्य के वास्ते बहुत अच्छा था. जब श्रीमान् अमीर कालने जारतकी यात्रा में हिंदुओोकी सातिर
के दिन दिल्ली में गोहत्या बंद रखा दीथी तो क्या दयालु सम्राट की सेवामें नियमपूर्वक प्रार्थनापत्र पहुंचने पर कुछ फल नहीं होता ? जरूर होता. क्योंकि यह किसीके स्वार्थकी बात नहींथी केवल बेजुबान पशुओं पर दया करके उनके दीनकी हुआ लेना और अपनी करोगों भारतप्रजाको प्रसन्न करना था. अ श्रीमान् सम्राट पंचम ज्योर्जजी वैसेही दयालु दीनबंधु दीनानाथ और क्षमाशीव हैं और जारतवासियों के सौजाग्यसे जनवरी सन २०१२ की किसी तारीख़को दिल्ली में पधार कर भारत साम्राज्यका राजमुकुट धारण करनेवाले हैं. जत्र तक आपकी सेवा नियमपूर्वक इस मार्थना के पहुंचने पर आशा है कि जीवहिंसा में कुछ कमी हो. हम चाहते ही क्या है ? ३६५ मेसे केवल ३० ही दिन जीवहिंसा नहीं होनेके वास्ते मांगते हैं, जिनमें आठ दिन तो बहुतही जरूरी हैं और ये दिन ऐसे पुनीत हैं कि इंगलिस्तानकी प्रजानी अपने सम्राट् और राजपरिवार के कल्याण के वास्ते उसमें कभी कुछ आगा पीछा नहीं करेगी. और ईसाई धर्मके पादरीजी उसको पसंद करेंगे. क्योंकि उनके धर्म और महात्मा ईसामसीह के उपदेशों दयाका अंश प्रति अधिक है।
दिन ये हैं
वे
( १ ) श्रीमती विक्टोरिया के जारतेश्वरी होने का शुभ दिन १ (५) श्रीमान् सप्तम एमवर्कके जन्म और निर्माणके दिन श्
( ३ ) श्रीमती राजमाता
( ४ ) श्रीमान् रुम्रार पंचम जॉर्जके जन्म ( ५ ) श्रीमती महारानी मेरीका जन्म दिन १
का जन्म दिन ?
और
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राजमुकुट
धारण के दिन