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________________ प्रतिमा क्रमांक 9 यह प्रतिमा गोमेध यक्ष एवं अम्बिका यक्षी की है यह देशी पाषाण एवं भूरे वर्ण की प्रतिमा है। द्विभुजी यक्ष-यक्षी ललितासन मुद्रा में आसीन है यक्ष-यक्षी दोनों ही अलंकारों से सज्जित हैं। दोनों के किरीट अत्यंत कलात्मक हैं। दोनों के ऊपर आम्रमस्तवक हैं उसकी कला भी असाधारण हैं। गोमेध के दाहिने हाथ में श्रीफल एवं बायें हाथ में सनाल पद्म है। अम्बिका के दायें हाथ में श्रीफल एवं बायें हाथ में पुत्र प्रियंकर है। सिरो भाग में पद्मासनस्थ नेमिनाथ की प्रतिमा है प्रतिमा की ऊँचाई लगभग 100 से.मी. है I 1 संदर्भ : 1. 2. 3. 4. 5. 6. 7. 8. प्रतिमा क्रमांक 10 यह प्रतिमा पहाड़ी के मंदिर के बाहर रखी है। यह भव्य प्रतिमा मुनिसुव्रतनाथ की है प्रतिमा की दोनों हथेलियाँ टूट गयीं है। पद्मासन मुद्रा में ध्यानस्थ मुनिसुव्रत सिंहासन पर आसीन है। सिर पर कुंचित केश राशि एवं केश लट कंधों पर लटकी है। सिर के पीछे प्रभामंडल एवं ऊपर त्रिछत्र है । त्रिछत्र के दोनों ओर गजकलश अभिषेक कर रहें हैं। बांयी ओर का गज टूट गया है ऊपर से गंधर्व देव पुष्पवर्षा कर रहें हैं। प्रतिमा के पार्श्व में चामरधारी हैं। पादपीठ पर कछुओं का चिन्ह बना है प्रतिमा लगभग 120 से.मी. ऊँची है । निर्वाण कांड, गाथा - 19 बलभद्र जैन, भारत के दिगम्बर जैन तीर्थ (तृतीय भाग), बम्बई - 1976, पृ. 162 मधूलिका बाजपेयी, म.प्र. में जैन धर्म का विकास, नई दिल्ली, 1989, पृ. 7 बलभद्र जैन : पूर्वोक्त, पृ. 162-163 नवनीत जैन, उत्तरी मध्यप्रदेश से विदित कुछ विलक्षण जैन प्रतिमाएँ, सूर्यप्रभा (स्मृतिग्रंथ), सं. हम्पा नागराजैय्या, 2010, पृ. 107-108 मधूलिका बाजपेयी, मध्यप्रदेश में जैन धर्म का विकास, नईदिल्ली, 1989 पृ. 32 प्राप्त: 20.06.10 बलभद्र जैन : पूर्वोक्त, पृ. 174 एम.एन.पी. तिवारी, जैन प्रतिमा विज्ञान, बनारस, 1981, पृ.2 अर्हतु वचन 23 (1-2), 2011 47
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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