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श्रुत सेवा यंग अवार्ड समर्पण समारोह सम्पन्न
धर्म प्रभावना जनकल्याण परिषद (रजि.) द्वारा युवा विद्वानों के प्रोत्साहन हेतु प्रतिवर्ष प्रवर्तित श्रुत सेवा यंग अवार्ड का समर्पण समारोह परम पूज्य आचार्य श्री सुनील सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, गोरेगांव मुम्बई में हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस वर्ष (2010) यह पुरस्कार युवा विद्वान पं. सागर जैन शास्त्री, मुम्बई को प्रदान किया गया।
समारोह का सफल संचालन श्री आशीष जैन शास्त्री जयपुर द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्व. श्रीमती कुन्ती देवी सुमत प्रसाद जैन की स्मृति में डॉ. सुधीन्द्र जैन मुम्बई ने अगले पाँच वर्ष तक अपनी ओर से उक्त पुरस्कार देने की घोषणा की।
आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने अपने आशीष वचन में कहा कि वन्दनीय विद्वान नहीं उसकी विद्वत्ता होती है। यह व्यक्तित्व का, गुणों का सम्मान है । सन्त और समाज के बीच की कड़ी हैं, विद्वान । विद्वानों का यथोचित सम्मान होना चाहिये । हम खूब ज्ञानी बने, ज्येष्ठ व श्रेष्ठ बने लेकिन पक्षपाती, पंथवादी, सन्तवादी न बने । उक्त पुरस्कार युवा विद्वानों में नई ऊर्जा का संचार करेगा।
स्वागत श्री सुनील प्रसन्न व आभार श्री सुनील संचय ने व्यक्त किया।
राष्ट्रसंत मुनि श्री पुलकसागर जी कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ में
बहुचर्चित राष्ट्रसंत, पूज्य मुनि श्री पुलक सागरजी महाराज दिनांक 15.10.2010 को कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ पुस्तकालय में पधारे। लगभग 1 घंटे के अपने प्रवास में पूज्य मुनि श्री ने ग्रंथालय में संग्रहीत पाण्डु लि पियों एवं दुर्लभ पुस्तकों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। इस अवसर पर अपने उदगार करते हुए पूज्य मुनि श्री ने कहा 'साहित्य संस्कृति के प्राण है । वह संस्कृति और सभ्यता मर जाती है जिसके पास साहित्य न हो। मैं यहाँ आकर पूर्ण आस्था से कह सकता हूँ। यह शोध संस्थान सम्पूर्ण साहित्यों के पुनर्जन्म की पुण्यभूमि बनेगी। मैं अपने शुभाषीश प्रदान करता हूँ।'
___मुनि श्री की अगवानी संस्था के अध्यक्ष डॉ. अजितकुमारसिंह कासलीवाल, आश्रम के अधिष्ठाता ब्र. अनिल जैन एवं प्रबंधक श्री अरविंद जैन ने की। ज्ञानपीठ के बारे में विस्तृत जानकारी सचिव डॉ. अनुपम जैन एवं पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. सुरेखा मिश्रा ने दी। इस अवसर पर बाल ब्र.पं. रतनलाल शास्त्री वीर निकलंक के सम्पादक श्री रमेश कासलीवाल, श्री माणकचंद जैन, आश्रम के ब्रह्मचारी भैय्या, श्राविकाश्रम की बहिनें एवं ज्ञानपीठ परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
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अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011