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________________ आवश्यकता इस बात की है कि दक्षिण भारत में ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं पर अनुसंधान किये जाए और उनके वास्तविक कारणों पर प्रकाश डाला जाये ताकि आगे जैन समाज संभलकर चले और इन घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और शोधार्थी को डॉक्टरेट आदि व उचित पारितोषिक भी दिये जाए । समाज वैसे भी विधान, मूर्ति प्रतिष्ठायें कराता रहता है उससे तो यह कार्य ज्यादा अच्छा है। मुझे तो यही लगता है कि किसी तरह से टोने-टोटके व संभादी विधाओं से राजा को प्रभावित किया गया। जैनों को उनके व्यापार, खेती आदि कार्यों में बाधाएँ की जाए, जमीनें छीन ली जाए, ऐसा होता होगा - इस प्रकार उस गांव या कस्बे से जैनों को विस्थापित कर दिया गया फिर उनके मकानों व खेतों पर कब्जा कर लिया गया और जब मंदिरों की देखभाल करने वाला कोई नहीं हो तो आसानी से उन्हें नष्ट कर धर्म परिवर्तन कर दिया गया होगा। अर्थात पीछे से कोई निशानी जैनत्व की न छोड़ी जाए मदुरै की पहाड़ियों में जो जैन मूर्तियां है वे बड़ी प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व की है। हमारी प्राचीन सभ्यता अब केवल दक्षिण भारत में ही बची हैं और वे भी नाप-तोल कर धीरे-धीरे नष्ट की जा रही है। सरकार में हमारा नेतृत्व है नहीं - श्वेताम्बर समाज को प्राचीन दिगम्बर धर्म की रक्षा से कोई मतलब भी क्यों हो? और अब रहे सहे दिगम्बर लोग, उनमें भी भेदभाव बहुत है जैसे 20 पंथी, 13 पंथी, कहानपंथी तो बस फिर इन बातों की चिंता और परवाह किसे होगी यह एक ज्वलंत प्रश्न है। *729, बरकत नगर जयपुर (राज.) प्राप्त : 23.09.10 अर्हत् वचन के सम्बन्ध में तथ्य सम्बन्धी घोषणा (फार्म - 4, नियम -8) प्रकाशन स्थल : इन्दौर प्रकाशन अवधि : ौमासिक मुद्रक एवं प्रकाशक : डॉ. अजितकुमारसिंह कासलीवाल राष्ट्रीयता : भारतीय पता : 580, महात्मा गांधी मार्ग, इन्दौर-452 001 मानद सम्पादक : डॉ. अनुपम जैन राष्ट्रीयता : भारतीय पता : ज्ञानछाया, डी-14, सुदामा नगर, इन्दौर - 452 009 स्वामित्व : कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, 584, महात्मा गांधी मार्ग, इन्दौर - 452001 मुद्रण व्यवस्था : सुगन ग्राफिक्स, एल.जी.11, ट्रेड सेंटर, साउथ तुकोगंज, इन्दौर ___ मैं डॉ. अजितकुमारसिंह कासलीवाल एतद् द्वारा घोषणा करता हूँ कि मेरी अधिकतम जानकारी एवं विश्वास के अनुसार उपरोक्त विवरण सत्य है। 28.02.2011 डॉ.अजितकुमारसिंह कासलीवाल अध्यक्ष-कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर 110 अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011
SR No.526589
Book TitleArhat Vachan 2011 01 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year2011
Total Pages140
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size2 MB
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