________________
+ ho
Cove
sou heat
STER+
sogh
on Chlorobenzene
sulphonie acid
p-chlorobenzene
®
No
|
+ ktop Conc. Is Ou, aap
Sulfhonic and
.
se Sogh
- Nitrobenz one sulphome acid दोनों रासायनिक क्रियाओं में विशेष अन्तर स्पष्ट दिखायी देता है कि क्लोराइड होने पर सल्फ्यूरिक एसिड की क्रिया से दो यौगिक मिलते हैं जिनमें एक में -So, समूह दूसरे कार्बन परमाणु पर तथा दूसरे समावयव में चौथे कार्बन परमाणु पर सल्फोनिक एसिड समूह संयुक्त हुआ जबकि नाइट्रोबेंजीन में नाइट्रो समूह होने से so, समूह तीसरे कार्बन परमाणु पर संयुक्त हुआ। निष्कर्ष निकलता है कि एक ही यौगिक बेंजीन भिन्न-भिन्न समूह या परमाणु होने पर क्रिया भिन्नभिन्न प्रकार से होती है अर्थात् यदि किसी स्थान पर कोई परिवर्तन या संयोग या बंध किसी प्रकार से होता है, तब उनका सम्पूर्ण प्रभाव ही विशिष्ट प्रकार का हो जाता है । इस तथ्य का आगे उपयोग किया जायेगा।
ऑक्सीजन व सल्फर का परमाणु संख्या क्रमशः 8 व 16 होने से इनमें कुल इलेक्ट्रॉन की संख्या 8 व 16 है जिनका वितरण क्रमशः (2,6) व (2,8,6) है अर्थात् दोनों के बाह्यतम् कोश में इलेक्ट्रॉन की संख्या 6-6 ही है किन्तु दोनों के गुणों में अन्तर निम्न प्रकार से स्पष्ट होता है।
ऑक्सीजन (Oxygen-0) व सल्फर (Sulphur-S) दोनों हाइड्रोजन (H) से संयोग करके समान प्रकार के यौगिक HO (जल) व H,S (हाइड्रोजन सल्फाइड) बनाते हैं, इनमें H,0 द्रव व H,S गैस है। क्यों ? ऑक्सीजन में रचना (2,6) होने से यह अपने नाभिक के प्रति आकर्षण अधिक रखती है जब सल्फर की रचना (2,8,6) अर्थात् इसमें एक कोश अधिक होने से नाभिक से दूरी बढ़ गयी, अतः 6 के प्रति आकर्षण कम हुआ जिससे यह निष्कर्ष निकला कि अपनी बाह्यतम कोश की रचना पूर्ण अर्थात् अष्टक (Octet - प्रत्येक तत्त्व का सामान्य स्वभाव है कि वह अपनी बाहरी ऑर्बिट में 8 इलेक्ट्रॉन पूर्ण करने की प्रवृत्ति रखता है, जिससे उनमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति उत्पन्न हो जाती है, जिसे विद्युत ऋणात्मकता कहते हैं) पूर्ण करने की प्रवृत्ति सल्फर की अपेक्षा ऑक्सीजन में अधिक है। इसी गुण के कारण H,S के अणु परस्पर संपर्क में आने पर भी सल्फर परमाणु दूसरे परमाणु से इलेक्ट्रॉन आकर्षित नहीं कर पाता, जिससे H,S का प्रत्येक अणु पृथक्पृथक् ही रहता है अर्थात् H,S गैस अवस्था में पायी जाती है। जबकि H,0 के अणुओं में अद्भुत प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। H,0 के अणु परस्पर सम्पर्क में आने पर H,O के अणु का ऑक्सीजन परमाणु, HO के दूसरे अणु के हाइड्रोजन परमाणु (जिसमें मात्र एक इलेक्ट्रॉन होने से, इसकी प्रकृति इलेक्ट्रॉन त्यागने की भी है अर्थात् यह विद्युत ऋणात्मक के स्थान पर विद्युत धनात्मक है। से एक विशेष प्रकार के आकर्षण बल से आंशिक बंध (---) बनाता है, जिसे हाइड्रोजन बंध कहते
अर्हत् वचन, 23 (1-2), 2011