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सारनाथ पुरातत्व अन्वेषकों के लिये एक महत्वपूर्ण स्थान है। सारनाथ में पुरातत्व की दृष्टि से काफी खुदाई हुई है। उस खुदाई में पुरातत्व सम्बन्धी मिली पुरानी वस्तुओं एवं मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिये सन् 1920 में एक पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना की गई थी। यह भारत सरकार के पुरातत्व विभाग के नियत्रण में है। पुरातत्व संग्रहालय सारनाथ में स्थित जैन धर्मशाला के परिसर से सटा हआ है।
अशोक स्तम्भ पुरातत्व संग्रहालय का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण है। यह भारत देश का राष्ट्रीय चिन्ह है एवं भारत के सभी नोटों पर मुद्रित है। अशोक स्तम्भ में चारों दिशाओं में मुख किये हुए चार शेर हैं। यह सर्वविदित है कि अशोक स्तंभ को सम्राट अशोक ने बनवाया था। लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि अशोक स्तंभ के स्वरूप में जैनधर्म की विशिष्ट छाप है। अशोक स्तंभ के चार चक्र हैं। प्रत्येक चक्र में 24 तीलियाँ हैं। अशोक ने 24 तीलियों को 24 जैन तीर्थंकरों के प्रतीक के रूप में बनवाया था। इस विश्वास का एक ठोस आधार है। चन्द्रगुप्त मौर्य ने भारत को यूनानियों से मुक्त कर देश में प्रथम गौरवशाली साम्राज्य की स्थापना की थी। उसने अपने जीवन के अंतिम चरण में जैनधर्म को अंगीकार किया था। अशोक चन्द्रगुप्त का पौत्र था। वह जीवन के प्रारम्भिक काल में जैन था एवं तभी उसने अशोक स्तंभ का निर्माण करवाया था।
आम जनता यह समझती है कि अशोक चक्र की 24 तीलियाँ 24 घंटे का प्रतीक हैं। भारत की पुरानी समय गणना पद्धति 1 दिवस (दिन + रात) = 60 घड़ी एवं 1 घडी = 60 पल पर आधारित थी। इस समय - गणना - पद्धति का प्रयोग भारतीय पंचांग में किया गया है।
अशोक स्तंभ में चार पशुओं - बैल, हाथी, घोड़ा एवं शेर की छबियाँ अंकित है। ये अशोक स्तंभ की चार दिशाओं में बने हुए हैं। हर एक पशु छबि के बीच में एक चक्र है। यह इस बात को दर्शाता है कि हर एक चक्र का 24 तीलियों से सम्बन्ध है। जैन मान्यता के अनुसार ये चार पशु चार तीर्थकरों के चिन्ह हैं - क्रम तीर्थंकर
चिन्ह
सिंह
प्रथम श्री ऋषभदेवजी
बैल द्वितीय श्री अजितनाथजी
हाथी तृतीय श्री संभवनाथजी
घोड़ा चौबीसवें
श्री महावीर स्वामीजी चक्र में चौबीसी तीलियाँ और चार पशुओं की अंकित छबि जैनधर्म के प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। अशोक स्तंभ के ऊपरी हिस्से में चारों दिशाओं में मुख किये हए चार शेर है जो चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर के चिन्ह हैं एवं महावीर के शान्ति संदेश को चारों दिशाओं में फैलाते हैं।
उपरोक्त लेख यह दर्शाता है कि सम्राट अशोक द्वारा बनाये गये अशोक स्तंभ की संरचना में जैन धर्म का विशिष्ट प्रभाव है। प्राप्त :09.04.02
* 81 - ए, जवाहरनगर कालोनी, भेलूपुर, वाराणसी (उ.प्र.)
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अर्हत् वचन, 14 (4), 2002
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