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संस्थान, हस्तिनापुर एवं चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में 4 अक्टूबर से 6 अक्टूबर 1998 के मध्य यह कुलपति सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों के वर्तमान एवं पूर्व कुलपतियों तथा प्रतिकुलपतियों ने भाग लिया। कुलपतियों का यह सम्मेलन समवेत स्वर में, एक मत हो निम्नलिखित अनुशंसाएँ 'जम्बूद्वीप घोषणापत्र 1998' के माध्यम से जारी करता है तथा आशा करता है कि इक्कीसवीं शताब्दी में हम नव विचारों के उन्मेष के साथ पदार्पण करेंगे। यह सम्मेलन यह भी विश्वास करता है कि भारतीयता की वितति को समर्पित अनेक इतिहासज्ञ, दार्शनिक, पुरातत्वविद्, श्रमण परम्परा के वस्तुनिष्ठ सत्यों के उद्भासन में अपना योगदान देंगे
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1. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुरोध है कि प्राकृत एवं भगवान ऋषभदेव की परम्परा के साहित्य को अपने अध्ययन सहाय्य कार्यक्रमों के अन्तर्गत बौद्ध अध्ययन, नेहरू अध्ययन, अम्बेडकर अध्ययन आदि के समान स्थान दें एवं इस विषय के समस्त अध्ययन कार्यक्रमों को गति दे ।
2. केन्द्र सरकार एवं समस्त राज्य सरकारों से अनुरोध है कि संस्कृत एवं पालि के समान प्राकृत को संघ लोक सेवा आयोग एवं राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित की जाने वाली परीक्षाओं में एक विषय के रूप में मान्यता दी जाये ।
3. राज्य सरकारों तथा सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकन्डरी एज्यूकेशन से अनुरोध है कि हाई स्कूल एवं इन्टरमीडिएट परिषदों में इण्टर स्तर तक प्राकृत को एक विषय के रूप में मान्यता प्रदान की जाये, साथ ही शिक्षकों के यथेष्ट पदों की स्वीकृति की जावे ।
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4. भारत के सभी कुलपतियों से आग्रह है कि डिग्री स्तर पर प्राकृत तथा भगवान ऋषभदेव की परम्परा के साहित्य के प्राध्यापन की समुचित व्यवस्था करायें एवं व्याख्याताओं के यथेष्ट पदों की स्वीकृति भी करायें ताकि प्राध्यापन कार्य सुचारू रूप से चल सके।
5. राज्यों की पाठ्यपुस्तक समितियों, राज्य शैक्षिक एवं अनुसंधान परिषद (S.C.E.R.T.) तथा राष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान परिषद (N.C.E.R.T.) से अनुरोध है कि वे अपेक्षित पुनरीक्षण कार्यशालाओं का आयोजन कर अपने संस्थानों से प्रकाशित पुस्तकों में जैन धर्म विषयक तथ्यात्मक विसंगतियों को दूर करने को सुनिश्चित करें, ताकि प्रामाणिक तथ्य सम्प्रेषित किये जा सकें। (विस्तृत आख्या अलग से प्रस्तुत )
6. केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारों से अनुरोध है कि भगवान ऋषभदेव समारोह के आयोजनों की शासकीय व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाये ।
7. सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से आग्रह है कि वर्ष में कम से कम एक दिन भगवान ऋषभदेव के सन्दर्भ में संगोष्ठियों / सेमिनारों / कार्यशालाओं / विशिष्ट भाषणों आदि के आयोजनों को सुनिश्चित किया जाये ।
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8. कुलपतियों की एक समिति गठित की जाये, जो उपर्युक्त अनुशंसाओं की कालबद्ध क्रियान्वित
को सुनिश्चित करे ।
जम्बूद्वीप, हस्तिनापुर
6.10.98
सम्मेलन में उपस्थित समस्त कुलपतिगण एवं जैन विद्या के मनीषी शताधिक विद्वत्गण
अर्हत् वचन, जनवरी 99