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________________ वक्ता तृतीय सत्र - अध्यक्षता संचालन वक्ता समापन सत्र अध्यक्षता मुख्य अतिथि संचालन 1. डॉ. सत्यदेव कौशिक, अलीगढ़ आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव और उनकी प्राचीनता डॉ. अरुणा शर्मा, कुरुक्षेत्र: 'ऋषभदेव तथा तत्प्रतिपादित समाज व्यवस्था' 3. डॉ. नीलम जैन, सहारनपुर: 'ऋषभदेव और नारी शिक्षा' 2. 4. प्रो. एस. पी. शुक्ल, कुरुक्षेत्र: 'तीर्थंकर ऋषभदेव के प्राचीन शिल्पांकन' 5. डॉ. राजेश्वर मिश्र, कुरुक्षेत्र : 'वैदिक साहित्य और ऋषभदेव' 6. श्री राजेश पुरोहित, कुरुक्षेत्र : 'Kalinga, An Ancient Seat of Jainism' 7. प्रो. आर. आर. नांदगांवकर, नागपुर: 'जैनाचार एवं पर्यावरण शुद्धि' 17.1.99, प्रातः 11.30 से 1.30 तक, सीनेट हॉल, कुरुक्षेत्र : : डॉ. नेमीचन्द जैन, सम्पादक - तीर्थंकर, इन्दौर डॉ. रणवीरसिंह, कुरुक्षेत्र 1. 2. 66 : : प्रो. परमानन्द गुप्त, कुरुक्षेत्र: 'षट्कर्म एवं कलायें' आचार्य गोपीलाल 'अमर' दिल्ली: 'Cosmological Details in Jaina 1 Literature' 3. डॉ. विश्वनाथ मिश्र, लाडनूं : परमाणुवाद और सृष्ट्युत्पात्ति 4. डॉ. रत्नलाल जैन, हांसी : 'वैदिक साहित्य में भगवान् ऋषभदेव' 5. डॉ. ब्रजेश कृष्ण, कुरुक्षेत्र : 'ऋषभदेव की प्रतिहारकालीन प्रतिमाएँ' 6. डॉ. भीमसेन जी, कुरुक्षेत्र : 'जैन दर्शन में अहिंसा और पाणिनि' 7. डॉ. सुरेन्द्रमोहन मिश्र, कुरुक्षेत्र : 'उड़िया भागवत में भगवान ऋषभदेव' 8. डॉ. रणवीरसिंह, कुरुक्षेत्र : 'ऋग्वेद में ऋषभ शब्द एवं उसके अर्थ' 9. प्रो. इन्दू शर्मा, निदेशक, कुरुक्षेत्र : 'प्राचीन साहित्य में भगवान् ऋषभदेव' 10. डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा, कुरुक्षेत्र : 'वर्तमान में श्रावकाचार की प्रासंगिकता' 11. डॉ. चितरंजन कौशल, कुरुक्षेत्र आदि तीर्थंकर ऋषभदेव का भागवत आधारित अलौकिक चरित्र 17.1.99, मध्याह्न 2.30 से 4.30 तक, : प्रो. मुनिलाल रंगा, कुलपति - कुरुक्षेत्र वि.वि., कुरुक्षेत्र प्रो. एस. पी. सिंह, कुलपति - आरा डॉ. रणवीरसिंह, कुरुक्षेत्र सीनेट हॉल, कुरुक्षेत्र : इस सत्र में ब्र. रंजनाजी के मंगलाचरण एवं पूज्य उपाध्याय श्री के मंगल आशीर्वचन के अतिरिक्त डॉ. एस. पी. सिंह, आरा का 'वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भगवान ऋषभदेव के शैक्षणिक अवदान की प्रासंगिकता' पर विस्तृत एवं सारगर्भित उद्बोधन हुआ। प्रो. धर्मचन्द्र जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो. एस. सी. अग्रवाल, मेरठ का आलेख 'जैनाचार एवं पर्यावरण शुद्धि तथा डॉ. धर्मचन्द्र जैन, कुरुक्षेत्र एवं डॉ. किरणकला जैन, कुरुक्षेत्र के आलेख समयाभाव में पठित स्वीकार कर लिये गये । भगवान ऋषभदेव राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन, हस्तिनापुर में की गई घोषणाओं के क्रियान्वयन में यह प्रथम संगोष्ठी अत्यन्त सफल रही। पूज्य उपाध्याय श्री की मांगलिक उपस्थिति ने वि.वि. एवं संगोष्ठी की गरिमा में अभिवृद्धि की । सचिव - कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, 584, महात्मा गांधी मार्ग, तुकोगंज, इन्दौर - 452001 अर्हत् वचन, जनवरी 99
SR No.526541
Book TitleArhat Vachan 1999 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year1999
Total Pages112
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size8 MB
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