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________________ अंत में प्राचार्य नरेन्द्रप्रकाश जैन का वीतराग विज्ञान पर प्रवचन अत्यन्त सारगर्भित एवं प्रभावक रहा। 4.10.98 - सप्तम सत्र श्री सौरभ जैन, झांसी ने मंगलगान प्रस्तुत किया। इस प्रात:कालीन सत्र के प्रमुख वक्ता प्राचार्य नरेन्द्रप्रकाश जी जैन थे। "मन एवं मनुष्याणां बंधनं मोक्षकारणं' पर केन्द्रित अपना प्रभावक प्रवचन किया। पूज्य मुनिश्री ने मन की पवित्रता पर राष्ट्रपति लिंकन का संस्मरण सुनाया एवं विनम्र व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया। 4.10.98 - समापन सत्र यह सत्र मुख्य अतिथि ‘पद्मश्री' बाबूलाल पाटोदी, इन्दौर के द्वारा दीप प्रज्वलन से प्रारंभ हुआ। विशिष्ट अतिथिगण थे - श्रीमती अनुराधा शंकरसिंह - पुलिस अधीक्षक, विदिशा, श्री सुरेश जैन, भोपाल, श्री हीरालाल झांझरी, अध्यक्ष - जैन समाज इन्दौर एवं महामंत्री श्री कैलाश वेद, श्री हृदयमोहनजी, पूर्व विधायक, विदिशा। श्रीमती अनराधा जी I.P.S विदिशा ने मौलिक चिंतनपूर्ण व्याख्यान देते हुए कहा कि जैन दर्शन की पाषाण में जीवन की परिकल्पना बड़ी वैज्ञानिक है क्योंकि विज्ञान में परमाणु भी गतिशील है और गति - जीवन का लक्षण है। श्री सुरेश जैन ने संगोष्ठी में लोकार्पित पुस्तक "ABC of Jainism" की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए संगोष्ठी की उपलब्धि को विज्ञान का आध्यात्मीकरण और अध्यात्म का वैज्ञानिकीकरण कहा। इसके लेखक श्री शान्तिलाल जैन ने पुस्तक की विशेषताएँ बताई। * संयोजक- जैन विज्ञान विचार संगोष्ठी प्राचार्य - शा. उ. मा. विद्यालय क्रमांक 3 के सामने, बीना (सागर) म.प्र. अ.भा. प्राच्यविद्या सम्मेलन, बड़ौदा में प्रोफेसर प्रेमसुमन जैन अध्यक्ष निर्वाचित अ.भा. प्राच्यविद्या सम्मेलन का 39 वां अधिवेशन महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा (गुजरात) में 13 से 15 अक्टूबर 1998 को आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में संस्कृत, प्राकृत, पालि, दर्शन, संस्कृति, इतिहास, ललितकला आदि के देश - विदेश से लगभग 700 मूर्धन्य विद्वान सम्मिलित हुए। प्राकृत एवं जैन धर्म खण्ड में भी 50 - 60 विद्वानों के शोध - आलेख सम्मिलित थे। इस प्राच्यविद्या सम्मेलन में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के प्रोफेसर एवं डीन डॉ. प्रेम सुमन जैन को सम्मेलन के कार्यकारिणी सदस्य और प्राकृत एवं जैन धर्म खण्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया है। इस पद को । प्रो. ए.एन. उपाध्ये, प्रो. हीरालाल जैन, प्रो. दलसुख भाई मालवणिया, प्रो. राजाराम जैन जैसे मनीषियों ने सुशोभित किया था। लगभग 20 वर्षों के अन्तराल के बाद पुन: किसी जैन मनीषी का इस पद पर निर्वाचन हुआ है। समाज इससे गौरवान्वित हुई है। अगला अधिवेशन मद्रास में होगा। प्रो. प्रेमसुमन जैन को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ परिवार की हार्दिक बधाई। 64 अर्हत् वचन, जनवरी 99
SR No.526541
Book TitleArhat Vachan 1999 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year1999
Total Pages112
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size8 MB
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