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संक्षिप्त आख्या
अर्हत् वचन (कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर)
चतुर्थ जैन विज्ञान विचार संगोष्ठी-98
बीना, 2-4, अक्टूबर 98,
| निहालचंद जैन *
पूज्य मुनि श्री क्षमासागरजी, ऐलक श्री प्रभावसागरजी एवं क्षुल्लक श्री नयसागरजी के पावन सान्निध्य में दि. जैन मंदिर, बीना (म.प्र.) के सभागार में 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर के मध्य चतुर्थ जैन विज्ञान विचार संगोष्ठी सम्पन्न हुई। उद्घाटन नई दिल्ली के श्री कमलकान्त जैसवाल, आई.ए.एस. (रेजीडेन्ट आयुक्त उ.प्र. सरकार) द्वारा दीप प्रज्जवलन से हुआ। मंगलाचरण सिद्धार्थ जैन की णमोकार मंत्र की संगीतमय प्रस्तुति से हुआ।
संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के जैन वैज्ञानिक एवं मनीषी उपस्थित हुए जिनका समाज के अध्यक्ष श्री अभय सिंघई एवं महामंत्री श्री विभव कोठिया ने उपहार देकर हार्दिक स्वागत किया। संगोष्ठी संयोजक प्राचार्य निहालचंद जैन ने संगोष्ठी का उद्देश्य बताते हुए इसे वैज्ञानिक दृष्टि सम्पन्न पुरोधा संत मुनि श्री क्षमासागरजी की सृजनशील चिंतन का सुफल कहा।
विद्वानों ने सात सत्रों में शोध आलेखों का वाचन प्रस्तुत किया। 2.10.98 - उद्घाटन प्रात:कालीन प्रथम सत्र
1. डा. नलिन के. शास्त्री, कुल सचिव, गया : ईश्वर की अवधारणा : पाश्चात्य चिंतन 2.10.98 - द्वितीय सत्र 1. श्री कमलकान्त जैसवाल I.A.S. : जैन धर्म समाज में 2. डा. आर.के. जैन, भोपाल : आधुनिक चिकित्सा पद्धति और अहिंसा 3. डा. अनिल जैन, अहमदाबाद : क्लोनिंग और कर्म सिद्धान्त 2.10.98 - तृतीय सत्र 1. डा. अशोक कुमार लाडनूं : जैन संस्कृति और समाज 2. डा. आर. के. जैन, विदिशा : भूमिगत वनस्पति और विज्ञान 3. डा. अभय प्रकाश जैन, ग्वालियर : आशीर्वाद का विज्ञान 3.10.98 - चतुर्थ सत्र
इसका शभारंभ सिद्धार्थ जैन के मंगलगान से हआ। इस सत्र के प्रमख वक्ता प्राचार्य नरेन्द्र प्रकाश जैन, फिरोजाबाद ने अपनी प्रभावक शैली में श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में पूज्य मुनि श्री के प्रवचन हुए। 3.10.98 - पंचम सत्र 1. डा. अशोक जैन, ग्वालियर : निगोदिया जीव और आधुनिक विज्ञान 2. डा. रतनचंद जैन, भोपाल : वैज्ञानिक जीवन पद्धति एवं अनेकान्त 3. प्राचार्य निहालचंद जैन, बीना : अजीव द्रव्यों की वैज्ञानिकता 4. डा. सुरेश जैन, विदिशा : उदुम्बर फल और विज्ञान 5. श्री अजित जैन 'जलज', ककरवाहा : अहिंसक आदर्श आहार - अण्डा या दूध ?
अर्हत् वचन, जनवरी 99