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________________ नहीं समझा जाना चाहिए कि सराक क्षेत्र में भगवान पार्श्वनाथ से पूर्व जैन धर्म नहीं था। भारत वर्ष में प्राय: सभी जातियों में उनके कुलदेवता होते है। साधारणतया अपने ही कुल में उत्पन्न कोई महापुरूष जिसने अपने ही धर्म और परम्परा को सृदृढ़ करने व मान्यताओं व आचरण को अधिक निर्मल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और एक विस्तृत भूभाग में रहने वाले जनसाधारण में उसका प्रभाव रहा हो। ऐसे असाधारण व्यक्तित्व को सहज ही कुल देवता मान लिया जाता है और पीढ़ी दर पीढ़ी उस जगह के दर्शन करने की भावना भी मन में बनी रहती है जहाँ से उस व्यक्तित्व का निर्वाण हुआ हो। सराक क्षेत्र में पूज्य गणेशप्रसादजी वर्णी, उपाध्याय श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज एवम् पं. बाबूलाल जी 'जमादार' के सद्प्रयत्नों से जो कुछ सराक भाइयों के मनोवृत्ति के सम्बन्ध में जानकारी मिली है उसमें उनकी यह भावना दृष्टव्य है कि वे वर्ष में कम से कम एक बार सम्मेद शिखर (रांची-धनबाद जिले के सराक) एवं खण्डगिरि - उदयगिरि (उड़ीसा के सराक बन्धु) या इनमें से किसी एक क्षेत्र की यात्रा अवश्य करना चाहते हैं। मेरा यह विनम्र निवेदन है कि सराक क्षेत्र में जैन धर्म भगवान पार्श्वनाथ से आरंभ हुआ नहीं मानना चाहिए अपितु यह अधिक प्राचीन है। सराक लोगों में कृषि करो या ऋषि बनो की धारणा पर्याप्त बलवती है और वहां पर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमायें उसी अनुपात में प्राप्त हई हैं जैसे कि भारत वर्ष के अन्य स्थानों पर। भगवान आदिनाथ की प्रतिमाओं की संख्या भी वहाँ बहुत है और अन्य तीर्थंकरों की भी। मानभूमि जिले के देवल टाड नामक स्थान पर लगभग 4 हाथ ऊँची भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के दर्शन सेठ बैजनाथ सरावगी कर चुके हैं इसी स्थान के सामने 1 हाथ ऊँची भगवान पद्मप्रभ की प्रतिमा का उल्लेख भी इसी अंक में है। पाकवीर नामक स्थान सराक क्षेत्र में पर्याप्त प्रसिद्ध हो चुका है वहाँ पर भी 9 फुट उँचे भगवान आदिनाथ है व अन्य अनेक मूर्तियों पर बैल या कमल का चिन्ह है। इसी स्थान पर प्राप्त एक चैत्य के चारों और क्रमश: महावीर, शान्तिनाथ, ऋषभदेव व कुन्थुनाथ खडगासन मुद्रा में आसीन हैं। PALACHERS ऋषभनाथ पाकबिरा 7 वीं शताब्दी शान्तिनाथ पाकबिरा 10 वीं शताब्दी अर्हत् वचन, जनवरी 99
SR No.526541
Book TitleArhat Vachan 1999 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnupam Jain
PublisherKundkund Gyanpith Indore
Publication Year1999
Total Pages112
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Arhat Vachan, & India
File Size8 MB
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