________________
અખિલ ભારતવર્ષીય પિરવાલ સમેલન અપીલપર સમ્મતિ.
विद्वानाने मुश ५१२.
गत १५-११-३२ को समाज सुधारक हितेषी, श्री. सरेमल घूहाजी अगवरी . .. समरथमलजी सिंधीजीने पोरवाल महा सम्मेलन भरने के लिये , नवलमल दानाजी, बेलॉगरी । गुरू निवेदन प्रगट किया है, उस विषयमें हम नीचे लिखे " शंकरलाल हिन्दूी , . . सही करनेवाले बडे मानपूर्वक अपनाते हुए साथ २ अपनी . परदीचंद बाजी, कलापरी 5 1 'सम्पति प्रगट करते है।
, पोकलचंद भूदाडी, सिआणी पोरवाल महा सम्मेलन बह शब्द “वेताम्बर जैन" पत्रके , पुनमचंद घसाजी, मनोया
27 अको पढते ही वटी प्रसवत्ता हुई। इस समाज का अबतक
आवश्यकता" .. कोइ सम्मेलन ही नहीं हुआथा । भान हमारे उत्साही भाव
श्री वेताम्बर जैन कन्या पाठशाला मु. गुडाबालोतरा • युवकने सम्मेलनको आवश्यक्ता बताते हुए जो निवेदन किया है वह मम्मो समाजके अन्धकार को दूर करनेकी किरण
(मारवार) के वास्ते एक सुयोग्य अध्यापिका कि जो जैन मूर्ती
पूजक दो व उन्की उन कयासे कम ३५-१० वर्षकी हो, पोरवाल भाइयो। कृपाकर आप इसकी ओर ध्यान दें,
विचारशील से। जो हिन्दि, गणीत, व धार्मिक विषयमें ऐच
प्रतिक्रमण, जीवविचार, एवं सागा,पोना, गूबना, अदि उयोवार्ता करें आपने सिधींजीका निवेदन पदा होगा, उसमे अपने से अपील की है, उन्होंने कितनी बात पर ध्यान खींचा है.
गोफ विषयकी जानकर हो, आगे किस जगह पदाती थी
सो भी लिखे, वेतन योग्यतानुसार दिया जायगा। उसपर बयान देना जरूरी है। समास पोरवालभाई अपने २ १ गांवकी सहीसे, अपनी सम्मति वर्तमान पत्रों में प्रगटकरे ।
शाह एस. टी. पोरवाल, भगोत्रा सुहाग हमारी सम्मति यह है कि, “परिचाल सम्मेलन जसरी
.... संचालक श्री सेवा समिति नव युवक मण्डल मिलना चाहीये । मिलना कहाँ ? तो उत्तरमै मालुम हो, स्थल
मु. पो. गुढाबालेसरा, स्टेशन एरणपुरा रोड (मारवाड) पवित्र भूमि बामणवाटजीमे झटाप और चैत्र मासमें तिथि - मुकरर करें तो, अति सुभीता है। एक बक भगवान महावीर देवने इस स्थल पर बिहारकर भूमि पनि कांथी, इससे हम
आज तक इस जगहको पवित्र तीर्थ मानते आये है, और - भगवान महावीरका जन्म इस चैत्र मासमें ही हुआया, और
(न्यायनो अ य ).... तीन लोकके अन्यकारमें प्रकाश चमक उठा था, इन्ही चिर
- જેની લાંબા સમયથી રાધ જોવાઈ રહી હતી અને જે स्मरणीय पवित्र दिगामें अन्धकार भगानेको प्रकाशपी प्रस्ताव बहार पहें तो, समाज वयशके, जिसमें सन्देह नहीं । हाळतो
- કલકત્તા, મુંબઈ અને બીજી અનેa " યુનિવર્સિટીના ગ્રેજ્યુએટન્ય
ક્રિાસંમાં' -પાથ પ્રથમા માં, અને એજયુકેશન બેઠું માં દાખલ થયેલ છે, हम अपन भाइथासे यह निवेदन करते है कि सुरत ही अपने
पापना माहितीय अथ “प्रमाणनयत-वालाक' (प्रभात. २.ग्रामसे तमाम सजनोफी सदी लेकर उपरोक्त महाशवजी के
તત્વાકાલંકાર) કે જેને ન્યાયામના ધુરંધર વિદ્વાન વાર્દિनिवेदन की मान पूर्वक पुष्टि करें, वही हमारी भाग्रह पूर्वक
દેવરિએ બનાવેલ છે. તે કરવું અને સુંદર લખે.જિની નામની विनति है।
તદ્દન નવી પ્રસિદ્ધ ' ટીકા સાથે ચેડા સમયમાં બહાર પડી. शा. मेवालाल हंसराजवी, देसेग्दर.
આ ગ્રંથને ન્યૂયકાતીર્થ, કલાકાર મુનિરાજશ્રી હિમાંશુकरलाल मनरुपजी, वरावा.
વિજયજીએ એડીટ કરેલ છે અને જેમાં નોટ, પાતર, મનુपारचन्द बनाजी,
ક્રમણૂિકા માર્દિ માપી પ્રસ્તાવનામાં પ્રય, ગ્રંયકાર અને જન " पमनलाल रूपाजी , ॥ पुरचन्द मनरुपजी, जावाल
ત્યાયના વિષયમાં સારો પ્રકાર પામે છે, અtવીય સ્તલી સુંદર । केशरीमक पळाजी, ५
કાગળ માં, કાઉન સેળપેજી સાઈઝ માં લગભગ તાબસે પૂઢના " पूलचन्द बाँसाजी, बरख्छ
Pार अनामत भार . .-१४-, यामाना ., रधुनाथजी रतनचन्द, ,, , एल. देवीचन्द जैनी, 'करनूल ,, पुल. की. जैनी लाहन्दी
મિરાસ એ. એમ. એન્ડ કું.) શ્રીવિજયધમ સુપ્રિથમાળા, , देवीचंद कपूराजी ,
भु. Itinue.
..] ... केसरीगल हिन्दूवी, पादित
(iflet4is)) For TE-(भाषा)
:
'Printed by Lalji Haraey. Ialan at Mahendra Printing Press, Gaya Building Masjid :' Bunder Rond Bombay, B. and Published by Shivlel Jhaverchand Sanghvi for
Jain Yuvak Sangh. at 26-30, Dhanji Street Bombay, 3.