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________________ wereverะะะะrtressvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvvะจะจ ०१०-१२-३२ स पारपालन्याती..२ानी... जोधपुरस्टेटमेंके महकमोमें परजी बंगरा करके कन्याके : पिसाकी व कन्याकी जमानत करा देना चाहिए, जिसे हडकीको पोरवाल जाति व मोसवाक जाति वोनु जाति है. इससे हटा सके पदि पके विवाह कर डाले तो उसे विचार पोरवाल जात्तिकी वस्ती सिरोही, जोरा, भगरा व गोडवाढ व करार नहि देना चाहिए. महा रुपण (मारवादी तीधी) के सताधीश, अत्तालीम, सोलावटी व सोराइ आदि प्रान्तोमें रोज संकटो नवयुवकोको यहां पहुंच कर इस वालिकाको उद्धार सुबही है. धनमें अन्धी है, हिमतमें कमजोर है, पाह- मुलचंद करके एक गांजवानके साथ घूमधामसे दाकुरसाहिबकी अध्यक्षता जेताजी (उमर वर्ष ५० मु. अगवरी वरपक्ष) व शाद. गुलाब- छत्रछायामें विवाह करा देना चाहिए, परन्ना इसकी सफलता चंद जेताजी (कन्याके पिता. रइंचाशी गुंदला. कन्याकी उम्मार विचारशील, जातिप्रेमी, उत्साही मारवाडके ओशवाल व पोरवाल वर्ष १३) दोनोको मेने का लिखाया किजोड निवाहकी को हीमत पहीकमत पर है. बात कहां तक सही व सचा है। परंतु अभी तक कोई उत्तर युवको! सभा करके निश्चितरूपसें घोषणा कर डालोकि नहि भाया, पोरवालजाति व ओशयालजाति उसी दुःखसे दुःखी यह विवाह नहि होने देगा, मैंने भोटिस जोधपुरके अफसरोके है जिससे भार जातियां दुम्ची है, लडकीयां गरीबोको नदि पास भेज दिये है. यदि लकी व बरका फोटु खोइ भेज दे तो मिलती, धनाडपोका लढकियां पयामें बेचकर विधवाका परिवार मेरा काम बहुतही सरल हो जायगा. दिन दुना रात चौगना बढ़ा रहा है. दुनिया काफी जग उठी शाह. केशरीमठ भंडाचत. भलमेर. है. माता पिता यह मान बैठे थे कि लडको, उगकी एक मात्र वार्षिक मेला - श्री सालीपार्श्वनाथ तीये मुः साली, प्रगणा पुंजी है. चाहे दान दे, दीक्षा दे, येचे, जातिसे संबंध नहि, जालोरमें प्रतिवर्ष के अनुसार मासि पोष कृष्ण १.(हिन्दि, समाजके बंधन कडे व कठीप है. बालिका छोटी उम्मर व शर्मके गुजराती मागशर वदी १०) ला, २२-१२-३२ को भरा जायगा, खातिर अपने खुनी व कसई माता पिता के प्रति कुच्छ बोल जिसमें गुदावालोतरा निवासी शा. हजारीमलनी सेखगल, कस्तुरजी नहि सकती. इनोने अपनी पुत्रियोंका रोजगार खोल दिया. भार हरजोके समनामी बदाजीकी तफंसे भाता दो दिया हजारो रुपये इन लडकियोंके गिनवाने लगते, हजारो श्यां जायगा, औरभी सजनाको तर्कले श्रीफल आदिको प्रभावना १वातिके कारण पोरवाल पोरवालमें परने तव जातिमें रहे. ओश-- दिया जायगा. पंचकल्याणी पूजा, मांगीरचना आदि धामधूमसे चाल ओशपाल जातिमें परणे तब जातिमें रहे. खुन-ही-मांस होगा, इस शुभ अवसरपर श्री उमेदपुरजनबालाधमके माथे-हाथ-लिलाटपर न पोरवाटके उपका रहता हैं, न विद्यार्थीगणं आयेग व अपना ड्रामा, लेक्चर आदि करेगा. ओशवालही लिखा है, ग महत्तर लगा रहता है. यह जातिका मार्थना है कि संघ मित्रमंडल सहित अवश्य पधारें, आनेवाले भेव संसारिक कर्मके लिये हुवा वही गुहस्थधर्मको मटियामेट सबागोंको जालोरकी पंचतीथिको यात्राका अलभ्प लाभ मिलेगा करनेवाला हो गया है. माज पोरवाल अपनी कन्याको दूसरी एणपुरा स्टेशनसे और जालोर (I. R.) स्टेशनसे मोटर, बेलजातिमें बेचे तो कभी इतनी उंची रकम नहि मिलेगी. यानी गाडी और उंट आदि बाहन मिलते है. लडका व लडकीका संबंध जतिसे है. जातिके सरीफ होनेसे - ही यह विवाह कहा जाता है. વિદ્વાનોને ખુશ ખબર. यदि पोरवाल माई इसमें सरीक न हो तो यह विवाह नहि (न्यायनो पूर्व ) कहा जायगा, पंच म्यात्तिके लिये बुलाये जाते है, पंचोके मारफत सगाई होती है, पंच पापी च पाखंडी व पिटोकडे हो गये. જેની લાંબા સમયથી રાહ જોવાê રહી હતી અને જે उनका अपने लण्डभोंसे मतलब रह गया, वर वधुको आयुसे ફકત્તા, મુંબઈ અને બીજી અનેક યુનિવર્સિટીના ગ્રેજયુએટના कोई प्रयोजन नहि है, यदि पिता अपनी पुषी पर कुछ अन्याय કામાં' થાય 2ષમામાં, ગાયને એજયુકેશન બેડ માં દાખલ થયેલ છે, अत्याचार करता है तो राज जुम्मेवार है. ठाकुरसाडिव विजय ते पानी माहिती५ ५ "प्रमाणनवत-रचालोक ' (प्रभानसिंहवी अगवरी व मुदलाके भाद्राजन ठाकुरसाहिब देवीसिंहजीको તવાલે કાન્ન દાર) કે જેને પૂરાના ધુરંધર વિદ્વાન વાદિनिवेदन है कि वे इस मामलाकी जांच-पड़ताल करके इस દેવસૂરિએ બનાવેજ છે. તે સસ્તુ અને સુંદર બાવાનેષિની નામની पोरवाल बालिकाकी रक्षा करे या कुरबानी रोके તદ્દન નવી મુ પ્રસિદ્ધ રીકા સાથે પૈડા સમયમાં બહાર પડશે. में अजमेरमै इतना र ई कि में जान नदि सकता मायने -१५-पतीय, त र भुनिया बिभाकि यह सच या झूठ है. पोरवाल एक-एक गोवसे ठाकुरसादियके वि0/40 २४ छ भने नट, २, andनामसे प्रार्थनापत्र जाना चाहिए. बाफरसाहिचही इस कामा भलिका मा आधी प्रस्तावनामा अथ, अया२ मनन थींडा उठाले तो आगे बबनेकी जरूरत नहि रहे. कारसाहिब न्यायना विपक्षमा सारे। थे.. NA २०ी सुंदर अच्छे विद्वान् च विचारशील है. उनके ठिकाने में यह जुल्म भटिभी , 181 सीण मामला सामना होना चाहिए. हमार बनी हिम्मत भार . .-१४-. माना है. मारचाड-गोडवाट आदि प्रदेशोंके समाज सेवा मंडल व पोस्टम मा. नवयुवकोंगो कमर कसके इस विवाइपर तीरजोरोस तान देना - भानु:चाहिए, और यदि इस विवादको रोक दिया तो आगे के लिये समभागाविसुनिया एसे खुनी य समानके खातरनाक वियाहाँको कालापानी हो भुपाsetup जायग'.. ( AED)) Grain ( 1) Printed by Lalji Harsey Lalan at Mahendra Printing Press, Gaya Building Masjid Bander Rod Bombay, 3 and Publisted liy Sivial Jhaverchand Sanghvi for Jain Yavak Sang, at 26-30. Dhanji Street Bombay, 3.
SR No.525793
Book TitlePrabuddha Jivan - Prabuddha Jain 1932 12 Year 02 Ank 06 to 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandrakant V Sutaria
PublisherMumbai Jain Yuvak Sangh
Publication Year1932
Total Pages42
LanguageGujarati
ClassificationMagazine, India_Prabuddha Jivan, & India
File Size4 MB
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