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केटलांक अप्रगट प्रतिमा लेखो
हिरेन के. दोशी
ऐतिहासिक संसाधनमा प्रतिमालेखो महत्त्वनी कडी समान छे. प्रतिमा लेखोनी साचवणीथी एक परंपरा अने इतिहासनुं जतन करी शकाय छे. प्रतिमालेखोमांथी विविध प्रकारनी विगतो तारवी शकाय छे. अत्रे प्रस्तुत प्रतिमा लेखो तीर्थयात्रा दरम्यान उतारवामां आवेला छे. क्रमांक नं. एकथी पांच उपर नोंधायेला प्रतिमा लेखो राजस्थानना भीनमाल नजीकना नरसाणा गामना खेतरमांथी प्राप्त थया छे.
प्रस्तुत अंकना मुख्य आवरण उपर आ पांचेय प्रतिमाजीओ जोई शकाय छे. आ पांचेय प्रतिमाजीओनी विगतो पू. आचार्यदेव श्री अरुणोदयसागरसूरीजी म. सा. नी सहायथी प्राप्त थई छे. तो क्रमांक छ अने सात उपर नोंधायेल प्रतिमाजी नाडलाई तीर्थना अने आठ अने नव नंबर उपर नोंधायेल प्रतिमाजी ओशियाजी तीर्थना जिनालयमां बिराजमान छे. प्रस्तुत लेखो उतारवा माटे ते ते तीर्थना संचालक श्रीनो खूब - खूब आभार...
१. संभवनाथ भगवान, पाषाणमय
सं. १५१२ वर्षे माघ वदि ९ शुक्रे श्रीब्रह्माणगच्छे श्रीशीलगुणसूरि प. श्रीव (ज) ज्जगसूरिपट्टे श्रीपजूनसूरीश्वरेण आत्म (मा) र्थे श्रीसंभवनाथ जीवि. बिम्बं कारितं ॥ २. नमिनाथ भगवान, पाषाणमय
॥ सं. १५१२ वर्षे माघ वदि ९ सु (शु) क्रे श्रीश्रीमालज्ञातीय महं........ भार्या कालू... दे पुत्र काना .... भा. कुतिगदे आत्मश्रेयोर्थं जीवितसामि श्रीन.. [म] नाथबिम्बं कारितं प्र. विषा [व] ल गच्छे [भ] श्रीअभयचंद्रसूरिभिः ॥
३. महावीरस्वामी भगवान (?), पाषाणमय
॥ सं. १५१२ वर्षे माघ वदि ९ शुक्रे श्रीब्रह्माणगच्छे श्रीश्रीमालज्ञातीय श्रे. कलस भार्या कपूरदे सुत देपा... गोवरा - देवरा - वणसीपूर्वज विं.... सांगा-धरणाखेतसी - ........... . थीदा-वेला... .मीभ्यां मिलित्वा जीवितस्वाम.. ...बिम्बं का. प्र. श्रीजजगसूरिपट्टे श्रीपजूनसूरिभि प्र... [तिष्ठितं ]
४. चंद्रप्रभस्वामी भगवान, पाषाणमय
॥ सं. १५१२ वर्षे माघ वदि ९ सु (शु) क्रे श्रीश्रीमालज्ञातीय ठ...... भार्या वांकुं....... आत्मश्रेयोर्थं श्रीचंद्रप्रभस्वामि बिम्बं कारितं
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