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संपादकीय
हिरेन के. दोशी श्रुतसागरनो अग्यारमो अंक तमारा हाथमां छे.
सच्चारित्र चूडामणि परम पूज्य आचार्यदेव श्री कैलाससागरसूरीश्वरजी म. सा. - आचार्यपदना अर्धशताब्दी वर्षनी पुनित वेळाए आ अंकमां पूज्यपाद् आचार्यदेवेश श्री कैलासागरसूरीश्वरजी म. सा. ना अमूल्य वचनोने गुरुवाणी हेठळ प्रकाशित कर्या छे. पूज्यश्रीना वचनोमा रहेलुं अध्यात्मनु भावसामर्थ्य आपणा जीवनने सक्षमता बक्षे छे. दर अंके प्रकाशित थती पूज्यपाद योगनिष्ठ पूज्य गुरुदेवश्री बुद्धिसागरसूरीश्वरजी महाराजानी रचनाओमां आ अंके हरिगीत छंदमां रचायेली मृत्यु पाछळनी अमरता अने सत्य प्राप्तिना आनंदने व्यक्त करता बे सुंदर पद्यो अने प्रकाशित कर्या छे.
अप्रकाशित कृतिनी श्रेणिमा उमेटा मंडन संभवजिन स्तवन प्रकाशित कर्यु छे. तेमज बे अप्रगट लघु कृति प्रकाशित करी छे. सविशेष गौरवनी वात ए छे के पूज्य महोपाध्याय श्री यशोविजयजी म. सा. नी एक अप्रकाशित कृति आ अंकमां प्रकाशित करीए छीए. आम कुल त्रण कृतिओ प्रकाशित थाय छे.
ऐतिहासिक सामग्रीना संकलनरूपे महाराष्ट्रमा रहेल अकोटा शिल्पनी आ पुरातन प्रतिमानो परिचय अत्रे प्रकाशित कर्यो छे. प्रतिमानी शैली, अने प्रतिमाना स्वरूपने आ लेखना माध्यमे जाणी शकाय छे. हस्तप्रतना परिचय रूपे हस्तप्रतना विविध प्रकारो अने एनी साथे सचवायेली श्रुतरक्षानी परंपरानो स्पष्ट ख्याल आवे ए हेतुथी हस्तप्रत परिचय नामनो लेख आ अंकमां प्रकाशित कर्यो छे.
जूना मेगेझिनमाथी प्रकाशित थती लेखश्रेणिमां आ वखते आचार्य श्री सोमसुंदरसूरिजी महाराजना जीवननो परिचय करावतो लेख “सोमसौभाग्यनुं विहंगावलोकन” अने प्रकाशित करेल छे. आचार्यदेव श्री सोमसुंदरसूरिजीना जीवनगुणने वर्णवती एक कृति ‘सोमसुंदरसूरि बिरुदावली कुलक' गया अंकमां प्रकाशित करी हती, सोमसौभाग्य काव्य अने सोमसुंदरसूरि बिरुदावली कुलकनी विगतोने तुलनात्मक रीते जाणी शकाय ए हेतुथी आ लेखने जैन सत्यप्रकाशमाथी साभार प्रकाशित करेल छे. . आचार्य श्री सोमसुंदरसूरिजी बाबते विशेष जाणवा माटे अभ्यासुवर्गे रंजनविजय जैन पुस्तकालय तरफथी वि. सं. २०५६ मा प्रकाशित सोमसौभाग्य महाकाव्यअवलोकन करवु.
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