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पार्श्वनाथ विद्यापीठ के प्राङ्गण में : 101 पार्श्वनाथ विद्यापीठ के आगामी अकादमिक आयोजनः १. प्राकृत भाषा एवं साहित्य विषयक पन्द्रह दिवसीय कार्यशाला- जैन विद्या के क्षेत्र में कार्यरत या कार्य करने के इच्छुक विद्वानों के लिए प्राकृत भाषा का ज्ञान अत्यावश्यक है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए पार्श्वनाथ विद्यापीठ, प्राकृत भाषा के प्रशिक्षण हेतु कार्यशालाएँ आयोजित करता रहता है। इसी क्रम में प्राकृत भाषा एवं साहित्य पर छठी कार्यशाला का आयोजन ३० मई से १३ जून २०१६ तक डॉ० श्रीप्रकाश पाण्डेय के निदेशकत्व तथा डॉ० राहुल कुमार सिंह के संयोजकत्व में किया जा रहा है। इस कार्यशाला में हेमचन्द्र प्राकृत व्याकरण के साथ-साथ प्राकृत काव्य एवं कथा साहित्य से सम्बन्धित ग्रन्थों का अध्यापन मुख्यरूप से प्रोफेसर दीनानाथ शर्मा, भाषा विभाग, गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा किया जायेगा। साथ ही प्राकृत विद्या के अन्य आयामों पर भी विद्वानों द्वारा विशिष्ट व्याख्यान होंगे। २. त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन- पार्श्वनाथ विद्यापीठ द्वारा २७-२९ अगस्त २०१६ को "Assemilative and Composite Character of Jaina Art : Its Socio Cultural Relevance in Modern Society" विषयक एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी के आयोजन के लिए 'भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली तथा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तिय सहायता प्राप्त हुई है। इस संगोष्ठी में पूरे देश से पधारे जैन कला के विशिष्ट विद्वानों द्वारा तीन दिन तक जैन कला और उसकी सामाजिकसांस्कृतिक उपादेयता पर गहन चिन्तन-मनन होगा। इस संगोष्ठी के आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रसिद्ध कलाविद प्रो० मारुति नन्दन प्रसाद तिवारी, प्रो० इमरीटस, कला इतिहास विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी हैं। इस संगोष्ठी में सहभागिता हेतु पंजीयन शुल्क शिक्षकों के लिए रु. १५००/- तथा छात्रों के लिए रु १०००/- निर्धारित किया गया है। पंजीयन की अन्तिम तिथि १५ अगस्त, २०१६ तथा शोधपत्र-सारांश भेजने की अन्तिम तिथि १५ जुलाई, २०१६ है। विशेष जानकारी के लिए सम्पर्क सूत्र : डॉ० श्रीप्रकाश पाण्डेय : ९९३६१७९८१७ डॉ० श्रीनेत्र पाण्डेय : ८८७४००००८४
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