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हिन्दी अनुवाद
या इन जानवरों से भरे जंगल में कोई उन्हें मार डाला हो। हे राजन्! देवी का अन्य कोई वृत्तान्त हमें ज्ञात नहीं है। गाहा
एवं च जाव जंपइ समरप्पिओ पत्थिवस्स से पुरओ।
ताव य दार-निउत्तो कय-विणओ एवमुल्लवइ ।।१३६।। संस्कृत छाया
एवञ्च यावज्जल्पति समरप्रियः पार्थिवस्य तस्य पुरतः ।
तावच्च द्वारनियुक्तः कृतविनय एवमुल्लपति ।। १३६ ।। गुजराती अनुवाद
१३६. आ प्रमाणे समरप्रिय अट ते राजानी आगल ज्यां वात करे छे त्यां तो करेलाविनयवालो द्वारपाल आ प्रमाणे बोले छे. हिन्दी अनुवाद
इस प्रकार समरप्रिय भट उस राजा के आगे जहाँ बात कर रहा था, वहाँविनयपूर्वक अभिवादन करता हुआ द्वारपाल आकर राजा से बोला। सुमति नाम के ज्योतिषी का आगमनः
गाहा
दारम्मि सुमइ-नामो नेमित्ती चिट्ठइत्ति सुणिऊण । भणियं रन्ना किं भो! सो एसो सुमइ-नेमित्ती? ।।१३७।। जस्साएसाउ तया दिन्ना नरवाहणेण मह देवी? । पास-ट्ठिएहिं सिटुं, नरिंद! एवंति, अह रन्ना ।।१३८।। भणियं पविसउ सिग्धं पुच्छामो जेण देवि-वुत्तंतं ।
वयणाणंतरमेसो पवेसिओ दारवालेण ।।१३९।। संस्कृत छाया
द्वारे सुमतिनामा नैमित्तिकस्तिष्ठति इति श्रुत्वा ।। भणितं राज्ञा किं भो! स एष सुमतिनैमित्तिकः ? ।। १३७ ।। यस्याऽऽदेशात्तदा दत्ता नरवाहनेन मम देवी ? । पार्थस्थितैःशिष्टं, नरेन्द्र ! एवमिति, अथ राज्ञा ।। १३८ ।।