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________________ सम्पादकीय नव वर्ष की मंगल कामना- दिनाङ्क ५ नवम्बर २०१० को दीपावली पर्व पर आपने निश्चय ही भगवान् महावीर का २५३७वाँ निर्वाण दिवस भक्तिभाव पूर्वक मनाया होगा और अन्तस्तल के गहन अन्धकार को आत्मा की दिव्य ज्योति से दूर किया होगा। भगवान् महावीर निर्वाण से प्रारम्भ होने वाले इस नवीन संवत्सर पर हमारी मंगल कामनाएँ स्वीकार करें। पार्श्वनाथ विद्यापीठ परिवार ने भी इस दिन अपने ७३ वर्ष पूरे करने पर दीपोत्सव सोत्साह सम्मिलित रूप से मनाया। जिज्ञासा-समाधान में इस पर्व पर विशेष लेख भी इस अंक में दे रहे हैं। इसके साथ ही इस त्रैमासिक में समाहित भगवान् पार्श्वनाथ जयन्ती ३१ दिसम्बर २०१० पर हमारी बधाइयाँ स्वीकार करें। ईसवीय वर्ष २०१० का समापन भी इसी दिन हो रहा है और रात्रि १२ बजे के बाद अगला सुप्रभात ईसवीय सन् २०११ का हो रहा है। ईसामसीह का जन्म दिन, 'क्रिसमस' भी २५ दिसम्बर को है। इस हेतु भी श्रमण-परिवार आप सबके प्रति अग्रिम मंगलकामना करता है। श्रमण का यह अंक और विद्यापीठ- मैंने अपने पिछले अंक (जुलाईसितम्बर २०१०) में कहा था कि अगला अंक ISSJS में समागत विदेशी विद्वानों के शोध-लेखों का होगा परन्तु उसे हम अपरिहार्य कारणों से इस अंक के साथ नहीं दे पा रहे हैं, बाद के किसी अंक में देने का पूरा प्रयास करेंगे। इस अंक में पूर्ववत् हिन्दी-अंग्रेजी के लेखों के साथ 'श्रमण-अतीत के झरोखे में का द्वितीय खण्ड प्रकाशित कर रहे हैं। इसमें ई. सन् १९९८ से दिसम्बर २०१० तक के श्रमण में प्रकाशित लेखों की सूची दी गई है जो शोधार्थियों को उपयोगी होगी। श्रमण के इस अंक के मुखपृष्ठ पर षड्-लेश्या का चित्र दिया गया है जो जैन दर्शन के मनोविज्ञानिक चिन्तन को दर्शाता है। क्रोध आदि कषायों से अनुरंजित- मन, वचन और शरीर की गतिविधियों की अवनति व उन्नति के स्तर को बतलाने वाली लेश्याएँ होती हैं। प्रत्येक जीव के शरीर के चारों ओर जो आभामण्डल (Oura) होता है उसके रंग को भी ये बतलाती हैं। ये आत्मा के साथ कर्म-बन्ध में गोंद की तरह कार्य करती हैं। ये छः प्रकार की हैं और अपने रंग के अनुसार व्यक्ति के चरित्र को बतलाती हैं। कृष्ण, नील, कापोत, पीत (तेज), पद्म और शुक्ल इनके माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक स्थिति को समझ सकता है। यह चित्र हमें डॉ. शुगनचन्द जैन के सौजन्य से प्राप्त हुआ है। आगे भी हम इसी तरह के चित्र मुखपृष्ठ
SR No.525074
Book TitleSramana 2010 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAshok Kumar Singh, Shreeprakash Pandey
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year2010
Total Pages138
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size10 MB
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