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श्रमण जुलाई-सितम्बर २०१०
विषयसूची १. प्रायश्चित्त तप क्यों
डॉ. सुदर्शनलाल जैन ७-११ २. जैन-विद्या के शोध-अध्ययन तथा शोध-केन्द्र : एक समीक्षा
प्रो० सागरमल जैन १२-२३ ३. पश्चिम भारत के जैनाचार्यों का साहित्यिक अवदान ऋचा सिंह २४-३९ ४. सारनाथ संग्रहालय में संगृहीत जैन मूर्तियाँ
डा० शान्ति स्वरूप सिन्हा ४०-४७ ५. भारतीय कला में लक्ष्मी-श्रीवत्स का अन्तस्सम्बन्ध और अंकन ४८-५४
डॉ. अयोध्या नाथ त्रिपाठी, डॉ. निर्मला गुप्ता ६. भारतीय परम्परा और कला में प्रतीक : सर्वधर्म समन्वय के साक्षी ५५-५९
प्रो० मारुतिनन्दन प्रसाद तिवारी ७. अंगविज्जा में कला-शिल्प
डॉ. अतुल कुमार सिंह ६०-६४ ८. प्राचीन भारत में भूमिदान की परम्परा
६५-७० (जैन भिक्षु विहारों के विशेष संदर्भ में) डॉ. प्रियंका सिंह 9. A Harmonious World Order Through Interfaith
Dialogue : The Jaina View
And Indian Experience Prof. Kamlesh Datta Tripathi 71-83 10. Tessitori's pioneering work on the
Uvaesamālā (Upadeśamālā) a basic book of Jaina Teachings
Nalini Balbir 84-97 11. Pratikramana : An Unparalleled.
contribution of Șramaņa tradition to Indian culture
Dr. Kamla Jain 98-103 12. Jain's Nonviolent Perspective of
Human Survival Samani Dr. Shashi Prajna 104-110 विशिष्ट व्यक्तित्व (कालजयी श्री भंवरलाल जी नाहटा) १११-११३ जिज्ञासा और समाधान (१. वैभाविकी क्रिया २. पर्युषण) ११४-११८ विद्यापीठ के प्रांगण में
११९-१२० जैन जगत्
१२१-१२४ साहित्य सत्कार
१२५-१२७ Statement about ownership...
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