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________________ गुजराती अर्थ___केम के स्वरूप जाण्ये छते कोई पण उपाय प्राप्त थाय छे. त्यारपछी में तेने संपूर्ण पूर्व घटना कही । हिन्दी अनुवाद क्योंकि स्वरूप जानने पर कुछ न कुछ उपाय मिलता है, तब मैंने उसे पहले की सारी घटना सुनाई ! गाहा उल्लंबण-अवसाणा तं सोउं सुप्पइट्ठ! तेणाहं । भणिओ जुवईए कए न हु जुत्तं उत्तम-नराण ।। १० ।। एरिसमायरिउं भो! विसेसओ तुम्ह नीइ-कुसलाण । जीवंता जेण नरा कल्लाण-परंपरमुविंति ।।११।। युग्मम् संस्कृत छाया उल्लम्बना-वसानात् तां शृत्वा सुप्रतिष्ठ! तेनाहम् । भणितो युवत्याः कृते न खलु युक्त- मुत्तम- नराणाम् ।।१०।। ईदृशमाचरितुं भो! विशेषतो युष्माकं नीतिकुशलानाम् । जीवन्तो येन नराः कल्याण-परम्परामुपयन्ति ।।११।। युग्मम् गुजराती अर्थ गळामा पाश सधीनी सम्पूर्ण वात सांभळीने हे सप्रतिष्ठ । तेणे मने कह्यु के, उत्तम पुरुषो ने युवतीने माटे आईं करवू योग्य नथी ! वळी विशेषथी नीतिकुशळ एवा तमारा माटे आवं आचरण अयोग्य ज छे, केम के जीवता माणसो कल्याणनी परंपरा ने मेळवे छे । हिन्दी अनुवाद हे सुप्रतिष्ठ ! कण्ठपाश तक की सम्पूर्ण घटना सुनकर उसने मुझसे कहा कि उत्तम पुरुषों को एक युवती के लिए ऐसा करना ठीक नहीं है ! विशेष रूप से आप जैसे नीतिकुशल मनुष्यों को ऐसा आचरण करना अयोग्य ही है ! क्योंकि जीवित मनुष्य कल्याण की परंपरा को पाता है । गाहा किंच! धन्नो सि तुमं जस्सत्थि ताव अन्नोन्न- वयण-संचारो। तह देवयाए वयणं आसाए निबंधणं अत्थि ।।१२।। 223
SR No.525062
Book TitleSramana 2007 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShreeprakash Pandey, Vijay Kumar
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year2007
Total Pages230
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size7 MB
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