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________________ जैन धर्म के जीवन मूल्यों की प्रासङ्गिकता : ८९ यह भोगवाद पर आधारित पर है। भौतिकताप्रधान पाश्चात्य युग की चकाचौंध का भीतरी पक्ष कितना अभिशाप-ग्रस्त है, यह एक गम्भीर चिंतन का विषय है। टूटते परिवार कुछ वर्षों पूर्व ब्रिटेन से प्रकाशित सुप्रतिष्ठित पत्र “दि इकोनॉमिस्ट' ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसने पाश्चात्य जगत् के विचारकों को भी चौंका दिया है। शीर्षक है- “इक्कीसवीं शताब्दी में अमेरिकी परिवार का भविष्य"। यह रिपोर्ट शिकागो विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मत अनुसन्धान केन्द्र ने २४ नवम्बर १९९९ को प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में प्रकाशित कुछ तथ्य इस प्रकार हैं__- अमेरिका में परिवारों के संचालन एवं बच्चों के लालन-पालन में विवाह-संस्था का महत्त्व घट गया है। - सन् १९६० एवं सन् १९९६ के बीच ३६ वर्षों में तलाक का प्रतिशत दुगुना हो गया है। - सन् १९६० में अविवाहित माताओं की संख्या ५ प्रतिशत थी, जो सन् १९६० में बढ़कर ३२ प्रतिशत हो गयी है। • सन् १९७२ में ७२ प्रतिशत अपने माता-पिताओं (विवाहित) के साथ रहते थे,सन् १९९६ में मात्र ५२ प्रतिशत बच्चे अपने माता-पिता दोनों के साथ रहते हैं। - अमेरिका में विवाहित स्त्री-पुरुषों को भी बच्चे नहीं चाहिए। सन् १९७२ ___ में ४५ प्रतिशत माता-पिताओं के बच्चे नहीं थे। - अब अमरीकी युवक-युवतियाँ बड़ी उम्र में विवाह करने लगे हैं तथा कई तो शादी के पहले कुछ काल तक शादी-शुदा जीवन का प्रयोग करते हैं। - अमेरिका में २५ प्रतिशत स्त्रियाँ अपने पतियों से अधिक आमदनी प्राप्त कर लेती हैं। लगभग ६ प्रतिशत पुरुष घरेलू काम-काज करते हैं तथा उनकी पत्नियाँ कमाई करती हैं। विद्यालयों में हिंसा . अमेरिका के विद्यालय परिसरों में हिंसा की घटनाएँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। अप्रैल १९९९ में लिटलटन, कोलोराडो में तब यह चरम सीमा पर Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.525057
Book TitleSramana 2006 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShreeprakash Pandey
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year2006
Total Pages170
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size8 MB
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