SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 131
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ साहित्य सत्कार : १२५ महापुरुषों का जीवन चरित्र सभी के लिये प्रेरणदायी होता है और उसे लोग अत्यन्त रुचिपूर्वक पढ़ते भी हैं। प्रस्तुत पुस्तक में प्रज्ञापुरुष मुनिश्री सुमन कुमार जी महाराज का जीवन परिचय दिया गया है। यह उन्ही की दीक्षा के ५२ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित की गयी है। इसमें श्वेताम्बर स्थानकवासी श्रमण परम्परा का परिचय, भगवान् महावीर की पट्ट परम्परा का विवरण; पंजाब श्रमण संघ की परम्परा, अ०भा० वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ की पट्टपरम्परा और तत्पश्चात प्रज्ञामहर्षि श्री सुमन कुमार जी मा०सा० का जीवन परिचय एवं उनकी साहित्य साधना का सुन्दर विवरण है। आपके द्वारा स्थापित विभिन्न धार्मिक संस्थाओं की एक तालिका भी इसमें दी गयी है। पुस्तक के अन्त में मुनिश्री द्वारा विभिन्न विषयों पर दिये गये प्रवचनों का सार-संक्षेप दिया गया है। वस्तुत: यह पुस्तक मुनिश्री के व्यक्तित्त्व और कृतित्त्व के प्रत्येक पहलू को पाठकों के समक्ष उपस्थित रखने में समर्थ है। भगवान् महावीर की पट्ट परम्परा, श्वे स्थानकवासी परम्परा एवं पंजाब स्थानकवासी और वर्धमान स्थानकवासी परम्परा का संक्षिप्त इतिहास देकर इसे हर दृष्टि से पूर्ण बनाने का सफल प्रयास किया गया है जिसके लिये सम्पादक बधाई के पात्र हैं। यह पुस्तक श्रावकों और विद्वानों के लिये समान रूप से उपयोगी है। इस महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ का प्रणयन करने वाले लेखक, सम्पादक और इसे अमूल्य पाठकों को प्रेषित करने वाले प्रकाशक सभी बधाई के पात्र हैं। साभार प्राप्त Mystic India Vol. 4. No. 3 May-June 2003 : Editor in chief - Suneel Babel, Editor - Ashok Sahajanand, Size - dimy, Registered office - D-65, Gulmohar Park, Gr. Floor, New Delhi; Price - Rs. 150/- One year (6 Issues) चौबीस तीर्थंकर विधान - रचनाकार - श्री राजमल पवैया; प्रथम संस्करणनवम्बर १९९९ ई०; प्रकाशक - अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन, ए - ४, बापूनगर, जयपुर ३०२०१५; आकार- डिमाई; पृष्ठ- २+१३५; मूल्य-१०/रुपये मात्र। श्री सीमंधर पंचकल्याणक विधान - रचनाकार - श्री राजमल पवैया, प्रथम संस्करण २००३; प्रकाशक - श्री भरत पवैया, संयोजक - तारादेवी पवैया ग्रन्थमाला, ४४, इब्राहीमपुरा, भोपाल-४६२००१ (म०प्र०) आकार - डिमाई, पृष्ठ ६४; मूल्य - १०/- रुपये। __ श्री पंचपरमेष्ठी मंगल विधान - रचनाकार - श्री राजमल पवैया, प्रथम संस्करण २००३, प्रकाशक - पूर्वोक्त, आकार - डिमाई; पृष्ठ ५६; मूल्य - १०/- रुपये। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.525049
Book TitleSramana 2003 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year2003
Total Pages136
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size7 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy