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________________ २१२ श्रावक धर्मविधिप्रकरणम् सम्पादक- मुनि चतुरविजय, प्रकाशक- श्री झालावाड़ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक तपागच्छ संघ ट्रस्ट, सुरेन्द्रनगर, गुजरात, मूल्य३५.००, पृ० ११०.००। श्रावकधर्मविधिप्रकरणम् में कुल १२० श्लोक हैं, जिनमें श्रावकधर्म के विधि-विधान विवेचित हैं। श्री चतुरविजय मुनि जी ने टीका सहित इसका सम्पादन किया है । इस पुस्तक की संस्कृत में टीका करके उन्होंने संस्कृत भाषिओं के लिये उपयोगी कार्य किया है। इससे संस्कृत साहित्य सम्पन्न होता है। अतः वे बधाई के पात्र है; किन्तु सामान्य लोगों को ध्यान में रखते हुए यदि श्रावकधर्मविधिप्रकरणम् की टीका हिन्दी या गुजराती में होती तो उससे साधारण पाठक भी लाभान्वित होते। हो सकता है मुनिजी आगे इस पर विचार करें। पुस्तक की बाह्य रूपरेखा आकर्षक और छपाई भी स्पष्ट है। डॉ० बशिष्ठनारायण सिन्हा सारस्वती सुषमा : सम्पादक- डॉ० हरिश्चन्द्रमणि त्रिपाठी, प्रकाशकसम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी, पृ० ११९-३५८, वि०सं० २०५४, मूल्य (वार्षिक) १००.००। सारस्वती सुषमा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की अनुसन्धान पत्रिका है, जो अपने सफल ५२वें वर्ष में गतिमान है। यह एक त्रैमासिक पत्रिका है। इसमें "निर्विशेषब्रह्मवाद, पारस्करगृह्यसूत्रोक्ताशौचनिरूपणम् न धातुलोप आर्धधातुके, कर्मसिद्धान्तविवेचनम्, अद्वैते प्रपञ्चोपादानत्वविमर्शः, महाकविभवभूतिनाथ्यसाहित्ये जीवनमूल्यदर्शनम्, भाणश्चतुर्भाणी च एवं आनन्दस्वरूपविमर्श ये आठ रचनाएं हैं, जो सारगर्भित एवं महत्त्वपूर्ण हैं। संस्कृत भाषा-भाषी लोगों की दृष्टि से यह एक महत्त्वपूर्ण पत्रिका है। यह एक लम्बे समय से संस्कृत-साहित्य के संवर्धन में योगदान करती आ रही है। आगे भी यह सफलतापूर्वक चलती रहे, इसके लिये मंगल कामना है। इसके लिए सम्पादक एवं सम्पादक मण्डल के विद्वान् बधाई के पात्र हैं। डॉ० बशिष्ठनारायण सिन्हा Best Jain Stories by Upadhyaya Shri Pushkar Muniji, Edited by Acharya Shri Devendra Muni, Publisher- Shri Tarak Guru Jain Granthalaya, Shastri Circle, Guru Pushkar Marg, Udaipur- 313001, First Edition, 1997, Pages- 244, Price - 100.00. Story is treated as an easy way of conveying difficult ideas and deep thinkings in simple and interesting forms to the common people. Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.525044
Book TitleSramana 2001 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year2001
Total Pages226
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size9 MB
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