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________________ जर्मन जैन श्राविका डॉ० शेर्लोट क्राउझे : 87 वि०सं० १९८४ में उपाध्याय मुनि मंगलविजय जी ने शास्त्र विशारद श्री विजयधर्म सूरि जी के जीवन पर काव्यमय रास “धर्म जीवन प्रदीप" लिखा जो श्री यशोविजय जैन ग्रन्थमाला, भावनगर से सन् १६२८ में प्रकाशित हुआ था। इसके परिशिष्ट में इतिहास तत्त्व महोदधि आचार्य श्री विजयेन्द्र सूरि जी का भी संक्षिप्त जीवन परिचय काव्य में लिखा है। इस प्रकरण में उन्होंने जैन जर्मन श्राविका डॉ० सुभद्रा देवी रास (डॉ० शर्लोटे क्राउझे) गुजराती भाषा में प्रकाशित किया है। उसी को यथावत् मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ जिससे पाठकगण स्वयं निर्णय कर सकेगें कि वह जर्मन श्राविका कितनी महान थीं और किस प्रकार उन्होंने जैन धर्म को ग्रहण किया तथा अपनी सेवायें दीं। जर्मन जैन श्राविका डॉ० सुभद्रादेवी रास (डा० शर्लोटे क्राउझे) दूहा सिंहावलोक न्याये करी, कहुं दत्तचित्त अवधार। यूरोपदेशीय मन धरी, कहुं किंचित अधिकार ।।१।। दृष्टि अभ्यासक मन करी, केईक करे त्यां अभ्यास । आचारे नहीं जैनता खरी, विचारक जैन केई खास ।।२।। पक्षपात मीशनरी घणों, स्कॉलर मां नहीं गंध। मध्यस्थ भाव स्कॉलर तणो, मीशनरी ते धर्मांध ।।३।। केई सरल स्वभावी घणां, यॉकोबी, हर्टेल, थोमस । बीजपण विद्वान् तणा, नाम उपलक्षे सुवास।।४।। हर्टेल-शिस्या मे खरी, जर्मनीमां सुप्रसिद्ध। अभ्यासक दृष्टि धरी, अभ्यास तिकां बहु किद्ध ।।५।। अभिधा जेहनी जाणे सहु, "क्रौजे" पी-एच०डी० धार । सर चालॉटे अवर बहु, यूरीपीयन नाम सार ।।६।। (ढाल-देसी) विलोकया शास्त्र अनेक दर्शननां, यूरापमां बहु बार रे। सहायक संस्कृत प्रोफेसरनां, टाइटल लॅपजिग अवधार रे।।१।। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.525032
Book TitleSramana 1997 10
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAshok Kumar Singh
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year1997
Total Pages160
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size7 MB
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