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श्रमण हिन्दी खण्ड प्रस्तुत अङ्क में
पृष्ठ संख्या
१-१३
१३-३५
३६.५२
१. द्वन्द्व और द्वन्द्व निवारण (जैन-दर्शन के विशेष प्रसङ्ग में)
- डॉ० सुरेन्द्र वर्मा २. अनेकान्तवाद और उसकी व्यावहारिकता
- डॉ० विजय कुमार ३. स्थानाङ्ग एवं समवायाङ्ग में पुनरावृत्ति की समस्या
- डॉ० अशोक कुमार सिंह ४. तित्थोगाली (तिर्थोद्गालिक) प्रकीर्णक की गाथा संख्या का निर्धारण
- अतुल कुमार प्रसाद सिंह ५. पिप्पलगच्छ का इतिहास
- डॉ० शिवप्रसाद
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