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श्रमण
शब्द साम्य : प्राकृत-अंग्रेजी
डॉ० सुरेन्द्र वर्मा प्राकृत भाषा संस्कृत का देशज रूप है। भारतीय सभी भाषाएँ बाद में प्राकृत से ही निकली हैं। यह बड़ी दिलचस्प बात है कि प्राकृत, भाषा के कुछ शब्द अपने अर्थ में हू-ब-हू अंग्रेजी शब्द ही लगते हैं -
हम सब केवल सब्जी ही नहीं खाते, सब्जियों का रसा भी पीते हैं। इसे झोल भी कहा गया है। इसी झोल के लिए अंग्रेजी शब्द 'सूप' है।आजकल 'सूप' लेना भोजनशिष्टाचार में चलन में आ गया है लेकिन आपको ताज्जुब होगा, प्राकृत भाषा में इसी झोल/रसे के लिए सूप' शब्द ही प्रयोग में आता था।*
देह के लिए प्राकृत में शब्द, बोदि' है। अंग्रेजी में इसे 'बॉडी' (बी ओ डी वाई) कहते हैं। है न चमत्कृत करने वाली समानता।
'मईअ' प्राकृत में मेरा या अपने के लिये इस्तेमाल होता है। अंग्रेजी में मेरे या अपने के लिये 'माई' (एम वाई) है। बस 'मईअ' का अन्तिम 'अ' 'म' में जुड़ गया और माई हो गया।
प्राकृत में फेंकने के लिए छोह' शब्द है। अंग्रेजी में इसी को 'थ्रो' (टी एच आर ओ डब्ल्यू ) कहते हैं।
बन्दर को प्राकृत में मंकणा' कहा गया है और (बन्दर की तरह ) कूद कर जाना 'मंकिय' है। अंग्रेजी में 'मंकी' सीधा बन्दर को ही कह दिया गया है।
प्राकृत में 'अवे' का अर्थ दूर हटने से है। अंग्रेजी में अवे' (एडब्ल्यू ए वाई) भी यही मायने देता है।
इसी तरह प्राकृत में मिश्रण करने को 'मिस्स' कहा गया है। अंग्रेजी में 'मिक्स' (एम आइ एक्स) कहते हैं।
प्राकृत में जानना या देखना ‘लक्ख' है। अंग्रेजी में 'लुक' (एल ओ ओ के)
खिलाड़ी जब कोई गलती कर बैठता है तो उसे 'आउट' कर दिया जाता है। वह निवृत्त हो जाता है। निवृत्त होने के अर्थ में ही प्राकृत भाषा में भी 'आउट्ट' शब्द ही प्रयुक्त किया गया है।
सूप' और 'बॉडी' शब्दों की अंग्रेजी में साम्यता के विषय में मेरा ध्यान सर्वप्रथम डॉ० सागरमल जैन ने दिलाया था। उनका आभार ।
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