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32. समयसारनाटक, बनारसीदास, उत्थानिका 28
33. भगवतीसूत्र, 7/10/121
34. स्थानांगसूत्र स्थान, 9
35. भगवद्गीता, 18/17
36. धम्मपद, 249
37. सूत्रकृतांग, द्वितीय श्रुतस्कन्ध, आद्रकसंवाद 2/6
38. जैनकर्मसिद्धान्त का तुलनात्मक अध्ययन, सागरमल जैन, पृ.
39. दशवौकलिकसूत्र, 4/9
40. सूत्रकृतांगसूत्र, 2 / 2/4
41. उत्तराध्ययनसूत्र, 28/14 42. तत्त्वार्थसूत्र, 1/4
43. इसिमासियाई (ऋषिभाषित), 9 / 2
44. समयसार ( कुन्दकुन्द), 145-146
45. प्रवचनसार टीका ( अमृतचन्द्र ), 1/72 की टीका
46. समयसार वचनिका, जयचन्द छाबडा, गाथा 145-146 की वचनिका पृ. 207
47. भगवद्गीता, 4/16
48. सूत्रकृतांग, 1/8/22-24
49. भगवद्गीता, 4/16
50. सूत्रकृतांगसूत्र, 1/8/1-2 51. वही, 1/8/3
52. आचारांगसूत्र, 1/4/2/1
53. जैन कर्मसिद्धान्त का तुलनात्मक अध्ययन, डॉ. सागरमल जैन, पृ. 52-55
54. वही, पृ. 61-67
55. वही, पृ. 57
56. (अ) वही, पू. 67-79
(ब) प्रस्तुत विवरण तत्त्वार्थसूत्र अध्याय 6 एवं 8, कर्मग्रन्थ प्रथम, ( कर्मविपाक )
पृ. 54 - 62, समवायांग 30/1 तथा स्थानांग 1 /4/4/373 पर आधारित है ।
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